Social Sharing icon

बरेली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक पहुंचने लगा है। बरेली में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की अचानक कमी ने बेकरी उद्योग, रेस्टोरेंट, ढाबों और मैरिज लॉन संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लगभग 1980 रुपये में मिलने वाला व्यावसायिक सिलिंडर अब ब्लैक में 2500 रुपये तक बिक रहा है। इससे खाद्य कारोबारियों की लागत तेजी से बढ़ रही है और कई छोटे प्रतिष्ठानों के सामने कारोबार बंद करने की नौबत आ गई है।

गैस संकट ने बरेली के खाद्य कारोबार को झकझोरा

बरेली में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की किल्लत ने होटल, रेस्टोरेंट और बेकरी उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। पिछले कुछ दिनों से शहर के कई इलाकों में गैस एजेंसियों पर सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित बताई जा रही है। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ रहा है जिनका पूरा काम गैस पर निर्भर है। बेकरी, मिठाई की दुकानें, फास्ट-फूड सेंटर और ढाबे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि कई एजेंसियों पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ स्थानों पर इसकी कालाबाजारी शुरू हो गई है। ऐसे में मजबूरी में कई लोग ऊंचे दामों पर सिलिंडर खरीद रहे हैं ताकि उनका कारोबार चलता रहे।

ब्लैक मार्केट में 2500 रुपये तक पहुंचा सिलिंडर

कारोबारियों के अनुसार, व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की अधिकृत कीमत लगभग 1980 रुपये है, लेकिन वर्तमान में इसकी कमी के कारण कुछ स्थानों पर यह 2500 रुपये तक बेचा जा रहा है। रेस्टोरेंट संचालक गौरांग खन्ना का आरोप है कि कुछ डिलीवरी कर्मी और बिचौलिये इस स्थिति का फायदा उठाकर सिलिंडरों की कालाबाजारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर स्थिति यही रही तो आने वाले दिनों में होटल और रेस्टोरेंट के लिए काम करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। कई छोटे दुकानदारों का कहना है कि महंगे सिलिंडर खरीदने से उनकी लागत इतनी बढ़ रही है कि मुनाफा लगभग खत्म हो गया है।

कोयले और पैकेजिंग की कीमतों ने भी बढ़ाई परेशानी

गैस संकट के बीच कारोबारियों के सामने दूसरा संकट ईंधन के विकल्प का है। कई ढाबा संचालकों ने गैस के विकल्प के रूप में कोयले का उपयोग करने की कोशिश की, लेकिन वहां भी कीमतें आसमान छू रही हैं। ढाबा संचालकों के अनुसार कोयले की कीमत करीब 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा प्लास्टिक दाने और पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। इसका असर खाद्य उत्पादों की लागत पर पड़ रहा है और आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो यह संकट और गहरा सकता है।

छोटे होटल और ढाबे बंदी की कगार पर

बरेली होटेलियर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार बड़े होटलों के पास फिलहाल कुछ दिनों का पुराना गैस स्टॉक मौजूद है, लेकिन छोटे होटल और ढाबे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। एसोसिएशन के डॉ. अनुराग सक्सेना का कहना है कि छोटे कारोबारी रोजाना सिलिंडर खरीदकर ही काम चलाते हैं, इसलिए आपूर्ति में थोड़ी सी भी बाधा उनके लिए बड़ी समस्या बन जाती है। कई ढाबा संचालकों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में सिलिंडरों की उपलब्धता सामान्य नहीं हुई तो उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है। इससे न केवल व्यापारियों को नुकसान होगा बल्कि कई लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा।

मैरिज लॉन और कैटरिंग कारोबार भी संकट में

गैस संकट का असर अब शादी-समारोह और कैटरिंग कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। बरेली बैंक्वेट हॉल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष गोपेश कुमार अग्रवाल का कहना है कि मैरिज लॉन और बैंक्वेट हॉल में भोजन तैयार करने के लिए एलपीजी सबसे जरूरी ईंधन है और इसका कोई आसान विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि कई कार्यक्रम महीनों पहले से बुक हो चुके हैं, जिन्हें किसी भी हालत में पूरा करना होगा। लेकिन अगर सिलिंडरों की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो शादी-समारोहों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उद्योग संगठनों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित हो रही है और यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो बरेली के खाद्य उद्योग के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *