उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों पर पुलिस ने साल 2025 में अभूतपूर्व कार्रवाई की है। पूरे साल में 14.42 लाख लोगों के चालान काटे गए, जिनसे करीब 283 करोड़ रुपये का जुर्माना बना है। आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा उल्लंघन बिना हेलमेट वाहन चलाने और रॉन्ग साइड ड्राइविंग के मामले में हुए। पुलिस का कहना है कि लगातार अभियान और आईटीएमएस कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
गाजियाबाद में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ा महंगा
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी अब लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगी है। साल 2025 में ट्रैफिक पुलिस ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड संख्या में चालान किए। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 14 लाख 42 हजार 525 चालान किए गए, जिनसे कुल मिलाकर लगभग 283 करोड़ रुपये का जुर्माना बनता है। यह आंकड़ा बताता है कि शहर में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कितनी बड़ी समस्या बन चुकी है। पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, लेकिन इसके बावजूद लोग नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
बिना हेलमेट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग सबसे बड़ी समस्या
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार सबसे ज्यादा चालान दो बड़ी लापरवाहियों के कारण हुए। पहली समस्या है बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना और दूसरी है रॉन्ग साइड ड्राइविंग।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार—
- 6.91 लाख चालान बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के किए गए
- 1.92 लाख चालान रॉन्ग साइड ड्राइविंग के लिए काटे गए
- 24,194 चालान ओवरस्पीडिंग के मामले में हुए
- 22,724 चालान रेस ड्राइविंग के लिए किए गए
इसके अलावा तीन सवारी, सीट बेल्ट न लगाने, नो एंट्री उल्लंघन और अन्य यातायात नियमों को तोड़ने के मामलों में भी हजारों चालान किए गए।
कैमरों के जाल में फंसे वाहन
गाजियाबाद में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) लागू किया गया है। इस सिस्टम के तहत शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं, जो नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान करके स्वतः चालान जनरेट करते हैं। डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन के मुताबिक आईटीएमएस लागू होने के बाद ऑनलाइन चालानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जहां यह सिस्टम मौजूद नहीं है, वहां ट्रैफिक पुलिस मैनुअल तरीके से चालान काटती है।
कई चालान अभी भी कोर्ट में लंबित
पुलिस के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग मौके पर या ऑनलाइन चालान भर देते हैं, लेकिन हजारों चालान अभी भी कोर्ट में लंबित हैं। कई वाहन मालिक चालान भरने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का इंतजार करते हैं, जिससे मामलों का निपटारा देर से हो पाता है। हाल ही में पुलिस ने ऐसे वाहनों की पहचान की थी जिन पर एक ही वाहन के कई चालान लंबित थे। इसके बाद वाहन मालिकों को नोटिस भेजकर कुछ वाहनों को सीज करने की कार्रवाई भी की गई।
सड़क हादसे भी बढ़े
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी का असर सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर सड़क हादसों की संख्या पर भी पड़ रहा है। गाजियाबाद में साल 2025 के दौरान—
- 1087 सड़क हादसे दर्ज किए गए
- करीब 400 लोगों की मौत हुई
पुलिस के मुताबिक 2023 की तुलना में 2025 में सड़क हादसों में करीब 10 प्रतिशत वृद्धि हुई है। मृतकों की संख्या में करीब 9 प्रतिशत और घायलों की संख्या में लगभग 17 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रोड इंजीनियरिंग भी बनी हादसों की वजह
अधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों पर सड़क की डिजाइन और ट्रैफिक प्रबंधन की खामियां भी हादसों की वजह बनती हैं। कहीं अचानक मोड़, कहीं खराब सिग्नल सिस्टम और कहीं अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था दुर्घटनाओं को बढ़ावा देती है। हालांकि पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन और ट्रैफिक विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
वाहन श्रेणी के अनुसार कार्रवाई
ट्रैफिक पुलिस ने विभिन्न श्रेणियों के वाहनों पर भी कार्रवाई की है।
इनमें शामिल हैं—
- बस और ट्रक
- स्कूल बस
- ट्रैक्टर-ट्रॉली
- चार पहिया वाहन
- तीन पहिया और ई-रिक्शा
- दोपहिया वाहन
इन सभी श्रेणियों में सबसे ज्यादा उल्लंघन दोपहिया वाहनों से जुड़े पाए गए।
जागरूकता और सख्ती दोनों जारी
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल चालान करना ही उद्देश्य नहीं है।इसके साथ-साथ स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें।डीसीपी ट्रैफिक का कहना है कि सड़क सुरक्षा तभी संभव है जब लोग स्वयं नियमों को समझें और उनका पालन करें।
नियम पालन ही बचा सकता है जिंदगी
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक नियम सिर्फ जुर्माना वसूलने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि लोगों की जान बचाने के लिए होते हैं।हेलमेट, सीट बेल्ट और सही दिशा में वाहन चलाना छोटी-छोटी सावधानियां हैं, लेकिन यही सावधानियां कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती हैं।गाजियाबाद के आंकड़े यह साफ बताते हैं कि अगर लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे तो सड़कें सुरक्षित नहीं हो पाएंगी।