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मिडिल ईस्ट का संकट अब और गहरा होता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों में सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने से रियाद में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। सऊदी अरब ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके इलाके या तेल-ऊर्जा सुविधाओं पर हमले जारी रहे तो वह जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में एक बड़े सैन्य टकराव की आशंका को जन्म दे दिया है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला तेज कर दी है। इन हमलों में सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। रियाद ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए साफ संकेत दिया है कि अगर उसके इलाके या ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया तो सऊदी अरब भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टकराव बढ़ता है तो खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य संकट खड़ा हो सकता है।

ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों से बढ़ी चिंता

रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने हाल के दिनों में ड्रोन और मिसाइलों के जरिए कई हमले किए हैं। इन हमलों का निशाना खाड़ी क्षेत्र के रणनीतिक ठिकाने और ऊर्जा ढांचे रहे हैं। सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है और उसके तेल संयंत्र तथा ऊर्जा संरचनाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे में इन पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता गहराने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।

सऊदी अरब की ईरान को सख्त चेतावनी

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल-सऊद ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर सऊदी अरब के इलाके या ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जाता है तो रियाद मजबूर होकर जवाबी कार्रवाई करेगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार प्रिंस फैसल ने यह संदेश अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत के दौरान दिया। इस बातचीत में उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का भी समर्थन किया। हालांकि इसके साथ ही सऊदी अरब ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा।

एयरस्पेस और सैन्य बेस को लेकर रणनीतिक संकेत

सऊदी अरब ने यह भी कहा है कि उसने फिलहाल अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। लेकिन सऊदी नेतृत्व ने यह संकेत भी दिया है कि अगर ईरान के हमले जारी रहते हैं तो भविष्य में अमेरिकी सेना को सैन्य ऑपरेशन के लिए एयरस्पेस या सैन्य बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत है और इससे क्षेत्र में सैन्य समीकरण बदल सकते हैं।

ईरानी राष्ट्रपति का माफी वाला बयान

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के राष्ट्रपति ने एक टेलीविजन भाषण में पड़ोसी देशों पर हुए हमलों को लेकर माफी भी मांगी है। उन्होंने कहा कि ईरान का किसी पड़ोसी देश पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है और अस्थायी नेतृत्व परिषद ने फैसला किया है कि जब तक पड़ोसी देशों से ईरान पर हमला नहीं होगा तब तक उन पर मिसाइल नहीं दागी जाएगी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ईरान क्षेत्र में शांति चाहता है और पड़ोसी देशों के साथ संबंध खराब करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

खामेनेई की मौत के बाद भड़का संघर्ष

मिडिल ईस्ट में मौजूदा संकट की शुरुआत तब हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया। रिपोर्टों के अनुसार इस हमले के शुरुआती चरण में तेहरान में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को निशाना बनाया गया था। बाद में 1 मार्च को ईरान ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की।

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