नई दिल्ली/गाजीपुर। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के फाइनल रिजल्ट के बाद एक चौंकाने वाला विवाद सामने आ गया है। ऑल इंडिया रैंक 301 को लेकर दो अलग-अलग राज्यों की दो अभ्यर्थी—दोनों का नाम आकांक्षा सिंह—अपनी-अपनी दावेदारी कर रही हैं। बिहार के आरा में जहां सफलता का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने भी उसी रैंक पर दावा करते हुए अपना एडमिट कार्ड और बारकोड सार्वजनिक कर दिया है।
UPSC रिजल्ट में एक रैंक पर दो दावेदार, सच्चाई क्या है?
देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली परीक्षा—संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा—के परिणाम हर साल हजारों युवाओं के सपनों को आकार देते हैं। लेकिन इस बार परिणाम घोषित होने के बाद एक ऐसा विवाद सामने आया है जिसने प्रतियोगी छात्रों और सोशल मीडिया दोनों जगह हलचल मचा दी है। मामला ऑल इंडिया रैंक (AIR) 301 को लेकर है, जहां दो अलग-अलग राज्यों की दो अभ्यर्थियों ने एक ही रैंक पर दावा किया है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों का नाम भी आकांक्षा सिंह ही है।
बिहार में जश्न, यूपी में सवाल
UPSC का फाइनल रिजल्ट शुक्रवार को जारी हुआ था। रिजल्ट सामने आने के बाद बिहार के आरा जिले में रहने वाली आकांक्षा सिंह के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि उनका परिवार ऐतिहासिक रूप से चर्चित व्यक्तित्व ब्रह्मेश्वर मुखिया से जुड़ा हुआ है, जिन्हें रणवीर सेना का प्रमुख माना जाता था। परिवार ने मिठाइयां बांटकर सफलता का जश्न मनाया और मीडिया में भी खबरें आने लगीं कि आकांक्षा सिंह ने AIR 301 हासिल की है। लेकिन इसी बीच कहानी ने नया मोड़ ले लिया।
गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने पेश किया दावा
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की रहने वाली डॉ. आकांक्षा सिंह ने भी उसी रैंक पर अपना दावा पेश कर दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की है और उनका नाम भी उसी रैंक पर है। गाजीपुर के जमानिया ब्लॉक के अभईपुर गांव की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पटना से एमबीबीएस की पढ़ाई की है और वह एक गायनोकोलॉजिस्ट भी हैं। डॉक्टर होने के बावजूद उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करना था। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से उन्होंने UPSC की तैयारी की और परीक्षा दी।
एयरफोर्स अधिकारी की बेटी हैं आकांक्षा
गाजीपुर की आकांक्षा सिंह का पारिवारिक बैकग्राउंड भी चर्चा में है। उनके पिता रणजीत सिंह उर्फ गुड्डू सिंह भारतीय वायुसेना में जूनियर वारंट ऑफिसर के पद पर तैनात हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। आकांक्षा के परिवार के लोग बताते हैं कि बचपन से ही वह पढ़ाई में बेहद मेधावी रही हैं और डॉक्टर बनने के बाद भी उन्होंने अपने बड़े लक्ष्य—सिविल सेवा—को नहीं छोड़ा।
एडमिट कार्ड और बारकोड से खुल सकता है राज
विवाद के बीच गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने मीडिया के साथ अपना UPSC एडमिट कार्ड भी साझा किया है। उन्होंने दावा किया है कि एडमिट कार्ड पर मौजूद बारकोड स्कैन करते ही सच्चाई सामने आ जाएगी। उनका कहना है कि यदि आयोग बारकोड या रोल नंबर के आधार पर जांच कराए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि असली रैंक किसकी है। आकांक्षा के अनुसार, “मैंने परीक्षा दी है और मेरे पास उसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। बारकोड स्कैन करने पर पूरी जानकारी सामने आ सकती है।”
दादा की मौत के कारण नहीं मनाया जश्न
गाजीपुर की आकांक्षा सिंह के पड़ोसियों के अनुसार, हाल ही में उनके परिवार में उनके दादा जी का निधन हो गया था। इसी कारण परिवार शोक में था और उन्होंने अपनी सफलता का जश्न सार्वजनिक रूप से नहीं मनाया। बताया जा रहा है कि जब तक मामला सामने नहीं आया, तब तक परिवार ने इस उपलब्धि को सार्वजनिक नहीं किया था। लेकिन जब किसी दूसरी उम्मीदवार द्वारा उसी रैंक पर दावा किया जाने लगा, तब आकांक्षा सिंह ने वीडियो जारी कर अपनी बात सामने रखी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या UPSC रिजल्ट में कोई तकनीकी त्रुटि हुई है, या फिर नाम की समानता के कारण भ्रम की स्थिति बनी है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि UPSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था में ऐसी गलती की संभावना बेहद कम होती है। संभव है कि नाम समान होने के कारण गलतफहमी पैदा हुई हो, या फिर किसी स्तर पर जानकारी अधूरी हो।
UPSC की ओर से अब सबकी नजर
इस पूरे विवाद के बाद अब सभी की नजर UPSC पर टिक गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर आयोग की साख बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि सचमुच एक ही रैंक पर दो दावेदार सामने आ गए हैं, तो आयोग को स्पष्ट रूप से स्थिति साफ करनी होगी। प्रतियोगी छात्र भी इस मामले को लेकर उत्सुक हैं, क्योंकि UPSC परिणाम देशभर के लाखों युवाओं के लिए भरोसे और पारदर्शिता का प्रतीक माना जाता है।