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नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के मंच से ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तीखा हमला बोला है। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने साफ शब्दों में कहा कि तेहरान के लिए यह संघर्ष अब “अस्तित्व का युद्ध” बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को रौंदते हुए ईरान पर हमला किया और यहां तक कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या तक कर दी।

रायसीना डायलॉग में गूंजा ईरान का सख्त संदेश

भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच रायसीना डायलॉग 2026 में उस समय वैश्विक राजनीति का तापमान अचानक बढ़ गया, जब ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने अमेरिका और इजरायल पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ जो सैन्य कार्रवाई की गई है, वह सिर्फ एक युद्ध नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था पर हमला है। खतीबजादेह ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ मौजूदा संघर्ष अब ईरान के लिए “अस्तित्व का युद्ध” बन चुका है। उनके शब्दों में, “जब किसी देश के अस्तित्व को खत्म करने की कोशिश की जाती है, तो उसके पास लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।”

खामेनेई की हत्या पर ईरान का गुस्सा

ईरान के उप विदेश मंत्री ने अपने भाषण में विशेष रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसी देश के सर्वोच्च नेता को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी सिद्धांतों के खिलाफ है। खतीबजादेह ने कहा, “यदि दुनिया यह स्वीकार कर लेती है कि किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष की हत्या युद्ध का नया नियम बन सकती है, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक होगा।” उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की खुली अवहेलना बताते हुए दुनिया के देशों से अपील की कि वे इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों।

अमेरिका-इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप

ईरानी उप विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला करने के लिए “झूठी सूचनाओं और मनगढ़ंत आरोपों” का सहारा लिया। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया में जो हालात बने हैं, वे पूरी तरह से इजरायल की रणनीति का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल लंबे समय से “ग्रेटर इजरायल” के विचार को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और इसी कारण उसने अमेरिका को इस युद्ध में घसीट लिया। उन्होंने दावा किया कि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को भी इस बात का अंदाजा है कि यह संघर्ष किस दिशा में जा रहा है।

श्रीलंका के पास ईरानी जहाज डुबोने का आरोप

खतीबजादेह ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी जहाज को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि यह जहाज निहत्था था और इस तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस घटना की “सजा जरूर दी जाएगी।” इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि यह आरोप सही साबित हुआ तो पश्चिम एशिया के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भी तनाव बढ़ सकता है।

भारत से संपर्क में ईरानी अधिकारी

रायसीना डायलॉग के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय अधिकारियों के साथ भी संपर्क किया। जानकारी के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी खतीबजादेह से संक्षिप्त मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब भारत ने खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया था। इस कूटनीतिक संवाद को क्षेत्रीय शांति और संवाद के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस संकट में संतुलित भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि उसके अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के साथ भी महत्वपूर्ण संबंध हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ रहा युद्ध का खतरा

विश्लेषकों के मुताबिक, मौजूदा हालात तेजी से बड़े क्षेत्रीय युद्ध की दिशा में बढ़ रहे हैं। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सीधे टकराव की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हमले के जवाब में उसने इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सावधान रहने और यात्रा से बचने की सलाह भी दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बढ़ी चिंता

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि खतीबजादेह ने स्पष्ट किया कि ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि शिपिंग कंपनियां खुद अस्थिर माहौल के कारण जहाज भेजने से बच रही हैं क्योंकि बीमा कंपनियां जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं। यदि यह मार्ग बंद होता है तो दुनिया की तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ईरान की चेतावनी – ‘आखिरी गोली तक लड़ेंगे’

अपने बयान के अंत में खतीबजादेह ने साफ कहा कि ईरान इस संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “यह ईरान के अस्तित्व का युद्ध है। यदि हम पीछे हटते हैं तो हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। हम प्रतिरोध करेंगे और इतिहास में यह दर्ज होगा कि ईरानी लोगों ने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी।” यह बयान संकेत देता है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।

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