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वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ से उठी एक तस्वीर ने उत्तर प्रदेश की सियासत और कानून व्यवस्था दोनों में हलचल मचा दी है। पॉक्सो एक्ट के मुकदमे का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ऐसी सजा की मांग की जो कल्पना से परे हो, लेकिन साथ ही आरोप असत्य साबित होने पर शिकायतकर्ताओं के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

कौन हैं स्वामी और कहां से उठा विवाद?

Varanasi के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में प्रवास कर रहे Swami Avimukteshwaranand इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे की जांच चल रही है। मंगलवार को स्वामी ने मीडिया के सामने एक तस्वीर पेश की, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। यह तस्वीर शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी और प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा की बताई जा रही है।

तस्वीर में क्या है और क्यों उठा सवाल?

तस्वीर में अधिकारी कथित तौर पर केक काटते दिख रहे हैं और शिकायतकर्ता उनके पास खड़े नजर आते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि यही अधिकारी उनके खिलाफ दर्ज यौन शोषण मामले की जांच देख रहे हैं। स्वामी ने इसे जांच प्रक्रिया में “निकटता का संकेत” बताते हुए सवाल खड़े किए कि क्या ऐसी परिस्थिति में निष्पक्ष जांच संभव है?

“अगर दोषी हूं तो मिले कल्पना से परे दंड”

स्वामी ने बयान में कहा—

“यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह दुर्लभतम श्रेणी का अपराध होगा। दोष सिद्ध होने पर ऐसा दंड मिले जिसकी कल्पना भी न की जा सके।”

लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि आरोप झूठे साबित होते हैं तो आरोप लगाने वालों पर भी उतनी ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस तेज हो गई है।

जांच की निष्पक्षता पर सीधा सवाल

स्वामी का तर्क है कि जिन बच्चों के शोषण का दावा किया जा रहा है, वे कभी उनके समक्ष नहीं आए और न ही उनकी संस्था से जुड़े रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि गो-रक्षा अभियान को कमजोर करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे हर प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं और पुलिस का सम्मान करते हैं।

सियासत भी कूदी मैदान में

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक रंग भी गहरा गया।

Ajay Rai, प्रदेश अध्यक्ष Indian National Congress, कार्यकर्ताओं के साथ मठ पहुंचे और स्वामी से मुलाकात की। अजय राय ने बयान दिया कि “धर्म के लिए संघर्ष करने वालों के साथ कांग्रेस खड़ी है।” उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि यदि प्रदेश सरकार गलत कर रही है तो हस्तक्षेप किया जाए। पार्टी ने राज्य के 75 जिलों में प्रदर्शन की घोषणा की है।

कानून, धर्म और राजनीति का संगम

यह मामला केवल एक एफआईआर या बयान भर नहीं रह गया है। इसमें तीन बड़े आयाम उभरकर सामने आए हैं:

  • कानूनी पहलू – पॉक्सो एक्ट जैसे संवेदनशील कानून के तहत आरोप।
  • धार्मिक आयाम – एक प्रमुख संत पर गंभीर आरोप।
  • राजनीतिक आयाम – विपक्ष का खुला समर्थन और सत्तापक्ष पर निशाना।

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