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होली पर घर लौटने की बेचैनी अब मुस्कान में बदलने वाली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 फरवरी से 9 मार्च तक अतिरिक्त बसों के संचालन का बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली, गाजियाबाद और पश्चिमी यूपी से भारी दबाव को देखते हुए विशेष इंतजाम होंगे, साथ ही उत्कृष्ट कर्मचारियों को हजारों रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

रंगों के महापर्व पर ‘सफर स्पेशल’: सरकार ने झोंकी पूरी ताकत

होली आते ही उत्तर प्रदेश में लाखों लोग अपने घरों की ओर रुख करते हैं। दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और अन्य पश्चिमी यूपी शहरों से पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य यूपी की ओर यात्रियों का सैलाब उमड़ पड़ता है। हर साल बस स्टेशनों पर लंबी कतारें, टिकट की मारामारी और खचाखच भरी बसें आम दृश्य बन जाती हैं। इस बार सरकार ने पहले से तैयारी कर ली है। 28 फरवरी से 9 मार्च तक पूरे प्रदेश में अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और अव्यवस्था की स्थिति न बने।

दिल्ली-गाजियाबाद पर विशेष नजर

परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने साफ कहा है कि सबसे ज्यादा दबाव दिल्ली और गाजियाबाद रूट पर रहता है। ऐसे में इन क्षेत्रों में पहले से बसों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित की जाएगी। रणनीति यह होगी कि यदि प्रारंभिक प्वाइंट से 60 प्रतिशत यात्री लोड मिलता है तो अन्य जिलों में भी उसी अनुपात में अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी। यानी स्थिति के अनुसार तुरंत निर्णय लिया जाएगा।

अवकाश पर रोक, 100% बसें ऑनरोड

सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पर्व अवधि में शत-प्रतिशत निगम बसें ऑनरोड रहें। अनुबंधित और आउटसोर्स कर्मचारियों को इस दौरान अवकाश नहीं दिया जाएगा। वाहन स्वामियों को भी पहले ही निर्देश है कि सभी बसों की मरम्मत कार्य समय से पूरा कर संचालन के लिए तैयार रखें। यह निर्णय इसलिए अहम है क्योंकि होली के समय अक्सर बसों की कमी और स्टाफ की अनुपलब्धता से यात्रियों को परेशानी होती है। इस बार सरकार कोई चूक नहीं चाहती।

सुरक्षा सबसे पहले: नशे में ड्राइविंग पर सख्ती

होली और मस्ती… लेकिन सड़क पर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चालकों और परिचालकों का ब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट किया जाएगा। नशे की हालत में वाहन संचालन पर सख्त कार्रवाई होगी।

साथ ही:

  • बसों की तकनीकी जांच अनिवार्य
  • सीटें और खिड़कियों के शीशे दुरुस्त
  • फायर सेफ्टी उपकरण उपलब्ध
  • बस स्टेशनों और बसों में स्वच्छता व्यवस्था

जाम या दुर्घटना की स्थिति में त्वरित नियंत्रण के लिए प्रवर्तन दल लगातार ड्यूटी पर रहेंगे।

कर्मचारियों के लिए ‘होली बोनस’ जैसा पैकेज

इस बार सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि ड्राइवर और कंडक्टर के लिए भी खास योजना लाई गई है। यदि कोई चालक या परिचालक प्रतिदिन औसतन 300 किमी बस संचालन करता है तो उसे 360 रुपये प्रतिदिन की दर से 10 दिन में 3600 रुपये मिलेंगे। यदि 10 दिन की पूर्ण ड्यूटी और निर्धारित मानक पूरा करते हैं तो 450 रुपये प्रतिदिन की दर से 4500 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। निर्धारित मानक से अधिक किलोमीटर पर प्रति किमी 55 पैसे अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाएगा।  डिपो और क्षेत्रीय कार्यशालाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी 10 दिन लगातार ड्यूटी पर 2100 रुपये और 9 दिन की ड्यूटी पर 1800 रुपये एकमुश्त मिलेंगे। यानी मेहनत का सीधा इनाम।

उत्कृष्ट प्रदर्शन पर अतिरिक्त सम्मान

सिर्फ प्रोत्साहन राशि ही नहीं, बल्कि सम्मान की भी व्यवस्था की गई है। सर्वाधिक आय प्रति बस प्राप्त करने वाले तीन क्षेत्रों के क्षेत्रीय प्रबंधकों और सेवा प्रबंधकों को प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। साथ ही 10 सर्वश्रेष्ठ डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इससे कर्मचारियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सेवा गुणवत्ता बेहतर होगी।

यात्रियों के लिए क्या मायने?

  • टिकट के लिए लंबी मारामारी कम होगी
  • खड़े होकर सफर करने की मजबूरी घटेगी
  • सुरक्षा बेहतर रहेगी
  • सफाई और सुविधा में सुधार
  • बसों की उपलब्धता अधिक

विशेषकर मजदूर, छात्र और नौकरीपेशा लोग जो छुट्टी पर अपने गांव जाते हैं, उन्हें इस व्यवस्था से बड़ी राहत मिलेगी।

सरकार के लिए भी बड़ी परीक्षा

होली केवल त्योहार नहीं, बल्कि प्रशासनिक चुनौती भी है। लाखों यात्रियों का सुरक्षित और सुचारु संचालन किसी बड़े अभियान से कम नहीं। इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह यात्रा प्रबंधन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेने वाली।अब देखना होगा कि जमीन पर व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और यात्रियों को कितनी राहत मिलती है।

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