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नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के बीच राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के कथित विरोध प्रदर्शन के बाद बीजेपी सड़कों पर उतर आई और 24 अकबर रोड के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हालांकि कुछ देर बाद उन्हें छोड़ भी दिया गया, लेकिन AI समिट को लेकर राजधानी में सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है।

भारत मंडपम में हंगामा, शर्टलेस प्रदर्शन

शुक्रवार को प्रदर्शनी हॉल नंबर-5 में अचानक 15-20 एनएसयूआई कार्यकर्ता घुस आए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने टी-शर्ट उतारकर शर्टलेस प्रदर्शन किया, जिन पर आपत्तिजनक संदेश लिखे थे। यह दृश्य समिट में मौजूद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। AI इम्पैक्ट समिट 2026 को भारत की तकनीकी उपलब्धियों का वैश्विक प्रदर्शन माना जा रहा है। ऐसे समय में हुए इस विरोध ने राजनीतिक रंग ले लिया।

BJP का पलटवार, 24 अकबर रोड पर प्रदर्शन

घटना के दूसरे ही दिन दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड के बाहर इकट्ठा हुए। नारेबाजी के बीच प्रदर्शन तेज होता गया।

स्थिति तब और नाटकीय हो गई जब वीरेंद्र सचदेवा बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पुलिस ने उन्हें नीचे उतरने को कहा, लेकिन प्रदर्शन जारी रहने पर एहतियात के तौर पर हिरासत में ले लिया गया। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

‘AI समिट राष्ट्र का कार्यक्रम’—सचदेवा

हिरासत में लिए जाने से पहले सचदेवा ने तीखा बयान देते हुए कहा,
“AI समिट किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्र का आयोजन है। इसमें दुनिया के प्रतिनिधि आए हैं। राहुल गांधी प्रधानमंत्री का विरोध करते-करते अब देश का विरोध करने लगे हैं। यह देश की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।” उनके इस बयान ने सियासी बहस को और तेज कर दिया।

‘देश की जनता देगी जवाब’—मनोज तिवारी

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कांग्रेस पर और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह कृत्य देशविरोधी है।
उन्होंने कहा, “भारत का गौरव बने AI इम्पैक्ट समिट को बदनाम करने की कोशिश गद्दारी और देशद्रोह के समान है। देश की जनता इसका जवाब देगी।” तिवारी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई।

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

बीजेपी का आरोप है कि यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि खराब करने की सोची-समझी रणनीति थी। वहीं कांग्रेस की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि उनका विरोध लोकतांत्रिक अधिकार के तहत था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AI समिट जैसे बड़े कार्यक्रम में इस तरह की घटनाएं वैश्विक संदेश देती हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

कानून-व्यवस्था पर पुलिस की नजर

दिल्ली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा और किसी बड़े टकराव की नौबत नहीं आने दी। हिरासत के बाद जल्द रिहाई से यह संकेत मिला कि प्रशासन स्थिति को शांत रखना चाहता था।

राष्ट्रीय बनाम राजनीतिक विमर्श

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक विरोध उचित है?
एक ओर बीजेपी इसे राष्ट्र की छवि पर हमला बता रही है, दूसरी ओर कांग्रेस इसे अपनी राजनीतिक असहमति का प्रदर्शन बता रही है। AI समिट 2026, जिसे देश की तकनीकी छलांग के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, उसी मंच पर शुरू हुई यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

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