शामली के डूंडूखेड़ा गांव में बिजली कनेक्शन कटने के बाद सियासत गरमा गई है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान और विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर सत्यप्रकाश के बीच फोन पर हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बातचीत के दौरान कथित तौर पर “बिजलीघर को आग लगाने” की धमकी और “लगा दो, आपका ही है” जैसे जवाब ने पूरे मामले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। सवाल सिर्फ बिजली बिल या बकाया का नहीं, बल्कि सत्ता और सिस्टम के टकराव का भी है।
“चैलेंज करोगे मुझे?” – बहस जिसने बढ़ा दी गर्मी
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में बिजली कटौती और बकाया वसूली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी प्रतिष्ठा और प्रशासनिक अधिकारों की लड़ाई में बदलता दिख रहा है। मामला गांव डूंडूखेड़ा का है, जहां बिजली विभाग की टीम ने बकाया बिल और कथित बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाया। कई उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए। इसी कार्रवाई के बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान ने विभाग के जूनियर इंजीनियर सत्यप्रकाश को फोन किया। फोन कॉल के दौरान हुई बातचीत का वीडियो सामने आया है, जिसमें तीखी नोकझोंक सुनाई देती है।
फोन पर गरजी आवाज़ – “बिजलीघर को आग लगा दूंगा मैं”
वायरल क्लिप में कथित तौर पर मनीष चौहान कहते सुनाई देते हैं—
“मतलब मेरे से बहस करोगे? क्या मुझे चैलेंज करोगे आप? लाइनमैन नहीं आएंगे तो इस बिजलीघर को आग लगा दूंगा मैं।”
इस पर जेई का जवाब आता है—
“लगा दो, आपका ही है।”
यही संवाद अब सोशल मीडिया पर बहस का केंद्र बन गया है।
राजनीति बनाम प्रशासन?
मनीष चौहान भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं और बताया जाता है कि वे एक वरिष्ठ एमएलसी के पुत्र हैं। ऐसे में यह टकराव महज एक स्थानीय बिजली विवाद से आगे जाकर राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक स्वतंत्रता के सवाल खड़े करता है। गांव वालों की शिकायत थी कि बिजली विभाग अचानक पहुंचा और कई कनेक्शन काट दिए। ग्रामीणों ने इसे “कठोर कार्रवाई” बताया, जबकि विभाग का पक्ष है कि यह नियमित बकाया वसूली और चोरी रोकने की कार्रवाई थी।
छह महीने पुरानी पृष्ठभूमि
बताया जा रहा है कि करीब छह महीने पहले भी इसी गांव में बिजली जांच के दौरान टीम के साथ कथित मारपीट हुई थी। उस समय जेई ने पुलिस को तहरीर दी थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई। अब ताजा विवाद ने पुराने जख्म हरे कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर बंटा जनमत
वीडियो सामने आते ही यूजर्स की बाढ़ आ गई।
कुछ लोगों ने इसे “जनप्रतिनिधि का आक्रोश” बताया, तो कई यूजर्स ने सवाल उठाया—क्या जनप्रतिनिधि को सरकारी संपत्ति जलाने की धमकी देना शोभा देता है?
कानूनी सवाल
अगर धमकी वाला बयान प्रमाणित होता है तो यह गंभीर मामला बन सकता है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है।