लखनऊ। राजधानी में आधार और पैन कार्ड की आड़ में करोड़ों रुपये का लोन फ्रॉड करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए यूपी एसटीएफ और साइबर क्राइम टीम ने मास्टरमाइंड आमिर अहसन को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि बैंक अफसरों की मिलीभगत से 100 से ज्यादा लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन पास कर रकम हड़प ली गई। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद घोटाले की परतें तेजी से खुलने लगी हैं और बड़े खुलासों के संकेत मिल रहे हैं।
100 से ज्यादा नाम, करोड़ों का खेल
राजधानी लखनऊ में सामने आए इस लोन फ्रॉड कांड ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गिरोह ने 100 से अधिक लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अलग-अलग बैंकों से करोड़ों रुपये के लोन पास कराए और रकम डकार ली। रविवार सुबह आईआईएम रोड स्थित सहारा होमर के पास से उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और साइबर क्राइम पुलिस की संयुक्त टीम ने मास्टरमाइंड आमिर अहसन को गिरफ्तार किया।
EMI मैसेज से खुली ठगी की पोल
हजरतगंज निवासी राज बहादुर गुरुंग की शिकायत ने इस घोटाले की पहली परत खोली। उनके परिचित ने लोन दिलाने के नाम पर आधार और पैन कार्ड लिया। बैंक शाखा में दस्तखत करवाए गए। कुछ महीनों बाद मोबाइल पर ईएमआई बकाया का मैसेज आया तो पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में पता चला कि उनके नाम पर 9.50 लाख रुपये का मुद्रा लोन और 1.50 लाख रुपये का कार लोन पहले ही स्वीकृत हो चुका था। यही कहानी दर्जनों लोगों के साथ दोहराई गई।
फोटो एडिट कर बनाई फर्जी पहचान
एसटीएफ के अनुसार, गिरोह आधार और पैन कार्ड पर लगी मूल फोटो को एडिट कर अपने गुर्गों की तस्वीर लगा देता था। इसके बाद फर्जी कंपनियों के कोटेशन तैयार होते, बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से लोन पास कराया जाता और रकम गायब। यह ठगी सिर्फ एक बैंक तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग शाखाओं और वित्तीय संस्थानों तक फैली हुई है।
बैंक अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में
इस मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की जानकीपुरम शाखा के मैनेजर गौरव सिंह समेत चार आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियां यह खंगाल रही हैं कि क्या यह नेटवर्क केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित था या इसकी जड़ें और गहरी हैं।
मास्टरमाइंड आमिर अहसन: पढ़ा-लिखा दिमाग, हाई-टेक ठगी
एएसपी विशाल विक्रम सिंह के अनुसार, आमिर अहसन ने बीए के साथ ड्राफ्ट्समैन का डिप्लोमा किया है। वर्ष 2018 में नावेद से मुलाकात के बाद दोनों ने इस फ्रॉड नेटवर्क की नींव रखी। गिरफ्तारी के समय उसके पास से मोबाइल फोन, कई कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, नकदी और चार लग्जरी गाड़ियां बरामद की गईं— जिनमें दो इनोवा क्रिस्टा, एक एक्सयूवी-500 और एक सियाज शामिल हैं। यह दिखाता है कि फ्रॉड से कमाई गई रकम किस तरह ऐशो-आराम में बदली जा रही थी।
साक्ष्य मिटाने की कोशिश
जांच की भनक लगते ही एक अन्य आरोपी ने अपना लैपटॉप और मोबाइल नदी में फेंककर सबूत मिटाने की कोशिश की। हालांकि एसटीएफ ने डिजिटल ट्रेल खंगालते हुए कई महत्वपूर्ण सुराग जुटा लिए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा।
कितने लोग हैं असली पीड़ित?
जांच एजेंसियां मान रही हैं कि पीड़ितों की संख्या 100 से भी अधिक हो सकती है। कई लोग अभी भी अनजान हो सकते हैं कि उनके नाम पर लोन चल रहा है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि अपने बैंक खातों और क्रेडिट रिकॉर्ड की नियमित जांच करें।
आगे क्या होगा?
13 सितंबर 2025 को STF ने चार आरोपितों को पकड़ा था। अब मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है। बैंक खातों, वॉलेट ट्रांजैक्शन और डिजिटल डेटा की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
बड़ा सवाल: बैंकिंग सिस्टम कितना सुरक्षित?
यह मामला केवल एक गिरोह की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह उस सिस्टम पर भी सवाल है जो पहचान सत्यापन और दस्तावेज़ों की जांच के लिए जिम्मेदार है। अगर फोटो एडिटिंग और फर्जी कोटेशन के जरिए करोड़ों रुपये निकाले जा सकते हैं, तो आम उपभोक्ता की सुरक्षा कितनी मजबूत है?