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महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को पूरा गोरखपुर शिवभक्ति में डूबा नजर आया। प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर से लेकर मानसरोवर और पितेश्वरनाथ मंदिर तक रुद्राभिषेक-जलाभिषेक कर प्रदेश की 25 करोड़ जनता के सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चार, पंचस्नान और हवन-अर्चन के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने धार्मिक आयोजन को विशेष आयाम दे दिया।

महाशिवरात्रि पर भक्ति और शक्ति का संगम

रविवार की सुबह गोरखपुर में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिली। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर Yogi Adityanath ने देवाधिदेव महादेव की उपासना कर प्रदेशवासियों के सुखमय और आरोग्यमय जीवन की प्रार्थना की। जैसे ही गोरखनाथ मंदिर परिसर में शंखनाद और घंटियों की ध्वनि गूंजी, माहौल भक्तिमय हो उठा।

Gorakhnath Temple में गूंजे रुद्रमंत्र

जनता दर्शन कार्यक्रम समाप्त करने के बाद मुख्यमंत्री मठ के प्रथम तल स्थित शक्ति मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान भोलेनाथ का दुग्ध, दही, घी, मधु और शर्करा से पंचस्नान कराया। वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुए रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद संहिता के रुद्राष्टाध्यायी महामंत्रों का उच्चारण हुआ। मंत्रोच्चार की गूंज और धूप-दीप की सुगंध से पूरा मंदिर परिसर मानो शिवमय हो गया। मुख्यमंत्री ने रुद्राभिषेक के बाद भगवान शिव से चराचर जगत के मंगल की कामना की।

मानसरोवर मंदिर में गूंजे शंखनाद

गोरक्षपीठ में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री अंधियारी बाग स्थित Mansarovar Temple पहुंचे। यहां भी उन्होंने विधि-विधान से दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक किया। हवन और आरती के साथ सम्पन्न पूजा में वैदिक मंत्रों की ध्वनि वातावरण को अलौकिक बना रही थी। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने सीएम योगी का स्वागत किया। सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा प्रदान की।

पितेश्वरनाथ में पांडवकालीन आस्था का स्पर्श

दोपहर बाद मुख्यमंत्री भरोहिया स्थित पांडवकालीन मान्यता वाले Piteshwar Nath Temple पहुंचे। यहां जलाभिषेक कर उन्होंने संपूर्ण मानव जाति के कल्याण की प्रार्थना की। कहा जाता है कि पितेश्वरनाथ मंदिर का गोरक्षपीठ से गहरा आध्यात्मिक संबंध है और हर महाशिवरात्रि पर गोरक्षपीठाधीश्वर यहां जलाभिषेक करने अवश्य आते हैं। इस परंपरा को निभाते हुए मुख्यमंत्री ने शिवभक्ति का संदेश पूरे प्रदेश को दिया।

जनता से संवाद, बच्चों को आशीर्वाद

जलाभिषेक के पश्चात मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से मुलाकात की। बच्चों से स्नेहपूर्ण बातचीत कर उन्हें आशीर्वाद दिया। स्थानीय खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाकर उनका उत्साह बढ़ाया। यह दृश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का भी संदेश देता नजर आया। विधायक फतेह बहादुर सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि इस अवसर पर उपस्थित रहे।

भक्ति में राजनीति नहीं, जनकल्याण का संदेश

महाशिवरात्रि जैसे आध्यात्मिक पर्व पर मुख्यमंत्री की सक्रिय उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच आस्था की परंपरा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रदेश की 25 करोड़ जनता के लिए सुख, समृद्धि और शांति की कामना ने आयोजन को व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अवसर जनता के मनोबल को मजबूत करते हैं और सांस्कृतिक एकजुटता को बढ़ाते हैं।

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