राजसमंद से एक ऐसी गिरफ्तारी हुई है जिसने देशभर की पुलिस फाइलें खंगाल दीं। 10 साल में छह राज्यों में 400 किलो से ज्यादा सोना लूटने का आरोपी मास्टरमाइंड सुबोध सिंह उर्फ ‘बबुआ’ आखिरकार राजस्थान पुलिस के हत्थे चढ़ गया। जयपुर, पुणे, नागपुर और बैरकपुर जैसे शहरों में बड़ी लूट की वारदातों को अंजाम देने वाला यह शातिर अपराधी जेल के अंदर से गैंग ऑपरेट करता था और नेपाल के रास्ते सोना गलवाकर बेच देता था।
400 किलो सोना, 6 राज्य और एक नाम… ‘बबुआ’ कैसे बना गोल्ड लूट का मास्टरमाइंड?
राजस्थान पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई ने देशभर की पुलिस एजेंसियों को राहत दी है। 400 किलो से ज्यादा सोना लूटने के आरोपी सुबोध सिंह उर्फ बबुआ की गिरफ्तारी ने उस आपराधिक नेटवर्क को उजागर किया है जो एक दशक से सक्रिय था।
बिहार से शुरू हुआ अपराध का सफर
बिहार के नालंदा जिले के चिस्तीपुर गांव में जन्मा बबुआ 12वीं तक पढ़ा। लेकिन 1996 के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। शुरुआत छोटे अपराधों से हुई। 1999 तक वह पुलिस मुखबिर भी बना रहा। यही उसकी सबसे खतरनाक ट्रेनिंग थी—उसे पुलिस के तरीके, कमजोरी और रणनीति का ज्ञान मिल गया।
जेल से गैंग ऑपरेशन
सुबोध कई बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन हर बार जमानत पर छूट गया। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि जेल में रहते हुए उसने अपना नेटवर्क खड़ा किया। बाहर आने के बाद उसने बड़े ज्वेलर्स और बैंक शाखाओं को टारगेट करना शुरू कर दिया। गैंग में 8 से 15 सदस्य शामिल होते। हर वारदात से पहले शहर की रेकी, सीसीटीवी का अध्ययन और एस्केप रूट तय किए जाते।
15 से 30 किलो सोना हर वारदात में
पुलिस के अनुसार हर बड़ी लूट में 15 से 30 किलो सोना हड़पा जाता था। यह कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि हाई-लेवल प्लानिंग वाला ऑपरेशन था। लूटा गया सोना नेपाल और पश्चिम बंगाल के रास्ते गलाया जाता। पहचान मिटाने के बाद इसे बाजार में बेचा जाता।
जयपुर से पुणे, नागपुर तक दहशत
2018 तक बबुआ की गैंग जयपुर, पुणे, नागपुर और बैरकपुर सहित कई शहरों में सक्रिय रही। कई मामलों में स्थानीय पुलिस को महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला। राजस्थान के राजसमंद में कांकरोली के रूपम गोल्ड ज्वेलर्स की लूट ने आखिरकार पुलिस को बड़ा सुराग दे दिया।
कांकरोली लूट के बाद घेराबंदी
23 अगस्त 2023 को चार बाइक सवार बदमाशों ने तीन किलो सोना और 18 लाख रुपये लूट लिए। पुलिस ने सीसीटीवी और नेटवर्क ट्रेसिंग के जरिए सुबोध सिंह तक पहुंच बनाई। करीब दो साल तक ट्रैकिंग, मुखबिर नेटवर्क और डिजिटल सर्विलांस के बाद पुलिस ने ओडिशा से उसे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस क्या कहती है?
कांकरोली थाने की सीआई सरोज बैरवा के अनुसार,
“लगातार जांच और लंबी योजना के बाद आरोपी को पकड़ा गया है। अब उसके गैंग के बाकी सदस्यों तक पहुंच बनाई जा रही है।”
400 किलो गोल्ड का हिसाब
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों को मिलाकर लूटे गए सोने की मात्रा करीब 400 किलो तक पहुंचती है। हालांकि जांच एजेंसियां अभी अंतिम आकलन में जुटी हैं। यदि यह आंकड़ा पूरी तरह प्रमाणित होता है तो यह भारत की सबसे बड़ी गोल्ड लूट सीरीज में से एक मामला बन सकता है।