नई दिल्ली। लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी टकराव अब अपने सबसे तीखे मोड़ पर पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति न दिए जाने और विपक्षी सांसदों के निलंबन जैसे मुद्दों को लेकर नाराज विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश कर दिया है। संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाला यह नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया है।
नई दिल्ली। संसद के मौजूदा सत्र में जिस राजनीतिक उबाल की आशंका जताई जा रही थी, वह अब खुलकर सामने आ गया है। विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर सत्तापक्ष को सीधे-सीधे चुनौती दे दी है। यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(सी) और लोकसभा के नियम 94(c) के तहत लाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के संस्मरण से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे, लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें रोक दिया।इसी दौरान सदन में हंगामे के बाद आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया। इन घटनाओं ने विपक्ष को यह कहने का मौका दे दिया कि लोकसभा का संचालन निष्पक्ष नहीं रह गया है।
विपक्ष का आरोप
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और अन्य दलों का कहना है कि—
- विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा
- सत्तापक्ष के सांसदों को खुली छूट है
- स्पीकर की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही
विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला बता रहा है।
नोटिस किसने सौंपा?
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद समेत कई वरिष्ठ सांसदों ने यह नोटिस Lok Sabha Secretariat को सौंपा।इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
टीएमसी क्यों अलग?
इस पूरे घटनाक्रम में तृणमूल कांग्रेस का रुख अलग नजर आया। टीएमसी सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए। हालांकि पार्टी की ओर से इसे लेकर आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।
Rule 94(c) क्या कहता है?
संविधान का अनुच्छेद 94(सी) यह प्रावधान देता है कि लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है, बशर्ते—
- प्रस्ताव को पर्याप्त सांसदों का समर्थन मिले
- पूर्व सूचना दी जाए
- प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हो
सत्तापक्ष की चुप्पी
अब तक सत्तापक्ष या स्पीकर कार्यालय की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्ष की रणनीतिक बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है।