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बरेली नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग इस समय गंभीर प्रशासनिक टकराव की चपेट में है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भानु प्रकाश के खिलाफ सफाई निरीक्षकों, जोनल स्वच्छता अधिकारियों और मुख्य सफाई निरीक्षक ने मोर्चा खोलते हुए उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों ने न सिर्फ उनके नेतृत्व में काम करने से इनकार कर दिया है, बल्कि चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो नगर निगम की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। मामला अब नगर आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद निस्तारण की ओर बढ़ा है, लेकिन तनाव अभी बरकरार है।

बरेली नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में उस समय हड़कंप मच गया, जब आठ सफाई निरीक्षकों, जोनल स्वच्छता अधिकारियों और मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षक ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भानु प्रकाश के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने उन पर मानसिक उत्पीड़न, मनमाने आदेश, तबादलों में पक्षपात और अवकाश रोकने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए उनके नेतृत्व में काम करने से साफ इनकार कर दिया। यह पूरा मामला सोमवार को उस समय सामने आया, जब मुख्य सफाई निरीक्षक एमपीएस सिंह राठौर और जोनल स्वच्छता अधिकारी विमल मिश्रा की अगुआई में सभी आठ सफाई निरीक्षक नगर आयुक्त संजीव कुमार के कार्यालय पहुंचे और लिखित ज्ञापन सौंपा।

ड्यूटी के बाद भी बुलाकर काम कराने का आरोप

ज्ञापन में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि निर्धारित ड्यूटी पूरी करने और घर पहुंचने के बाद उन्हें बार-बार फोन कर दोबारा कार्यालय बुलाया जाता है और नए-नए कार्य थोपे जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह न सिर्फ सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा बिना किसी स्पष्ट कारण के मनमाने तबादले किए जा रहे हैं। इसके अलावा अवकाश स्वीकृत न करना, अच्छे कार्यों की सराहना के बजाय सार्वजनिक रूप से फटकार लगाना और दबाव बनाकर काम कराना आम बात हो गई है।

‘मौजूदा नेतृत्व में काम संभव नहीं’

जोनल स्वच्छता अधिकारी विमल मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कैडर में कार्यरत सभी सफाई निरीक्षक इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में काम करना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी भी पूरे मामले में सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो सफाई व्यवस्था ठप होने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

कर्मचारियों की दो टूक: आयुक्त के आदेश पर ही करेंगे काम

कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं, जबकि नगर निगम के प्रशासनिक प्रमुख नगर आयुक्त होते हैं। ऐसे में जब तक यह विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक सभी सफाई निरीक्षक और जोनल स्वच्छता अधिकारी केवल नगर आयुक्त के आदेशों का पालन करेंगे। इस बयान के बाद नगर निगम के अंदरूनी कामकाज और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी का पलटवार

दूसरी ओर, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भानु प्रकाश ने सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी का कोई उत्पीड़न नहीं किया गया है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में काम पूरी तरह शासनादेश और नियमों के अनुसार लिया जा रहा है। कुछ कर्मचारी अनावश्यक दबाव बनाना चाहते हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विवाद की जड़ एसीआर?

उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नैन सिंह ने पूरे विवाद की जड़ एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) को बताया। उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारी एसीआर को मनमाने तरीके से भेजने का दबाव बना रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। उनके अनुसार, एसीआर एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसे तय मानकों के अनुसार ही प्रेषित किया जा सकता है। किसी भी प्रकार की सिफारिश या दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नगर आयुक्त का हस्तक्षेप, जल्द निस्तारण के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त संजीव कुमार ने दोनों पक्षों की बात विस्तार से सुनी। इसके बाद उन्होंने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि सफाई निरीक्षकों और अधिकारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। नगर आयुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि सभी कर्मचारियों की एसीआर नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से प्रेषित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

प्रशासनिक टकराव से व्यवस्था पर असर की आशंका

नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में इस तरह का खुला टकराव पहली बार नहीं है, लेकिन जिस तरह कर्मचारियों ने खुलेआम नेतृत्व मानने से इनकार किया है, उसने प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संवाद और समाधान नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

अब निगाहें प्रशासनिक फैसले पर

फिलहाल, नगर आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत होने की दिशा में है, लेकिन कर्मचारी अपने रुख पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या स्वास्थ्य विभाग में भरोसे का माहौल दोबारा बन पाता है या नहीं।

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