लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे अहम पड़ाव सोमवार से शुरू होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 9 फरवरी से शुरू होकर 20 फरवरी तक चलेगा, जिसमें 11 फरवरी को योगी सरकार अपना बहुप्रतीक्षित बजट पेश करेगी। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा, ऐसे में इस सत्र पर सत्ता-विपक्ष ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
यूपी सरकार का बजट सत्र कल से: 9 लाख करोड़ के बजट पर टिकी प्रदेश की निगाहें
उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन के लिहाज से सोमवार का दिन बेहद अहम होने जा रहा है। राजधानी लखनऊ में 9 फरवरी से यूपी विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है, जो सीधे-सीधे प्रदेश की विकास दिशा और आगामी चुनावी रणनीति तय करेगा। यह सत्र इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह योगी आदित्यनाथ सरकार का आखिरी पूर्ण बजट सत्र माना जा रहा है।
राज्यपाल के अभिभाषण से सत्र की शुरुआत
विधानसभा के प्रमुख सचिव द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, सत्र की शुरुआत 9 फरवरी को सुबह 11 बजे राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण से होगी। वे विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। इसके बाद औपचारिक कार्य होंगे। 10 फरवरी को सदन में दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी और कार्यवाही स्थगित रहेगी।
11 फरवरी को पेश होगा बहुप्रतीक्षित बजट
11 फरवरी को सुबह 11 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। इस बजट का आकार करीब 9 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई जा रही है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में यूपी का बजट करीब 8.08 लाख करोड़ रुपये था, जो उससे पहले के साल की तुलना में लगभग 9.8 प्रतिशत अधिक था। इस बार सरकार और भी बड़ा बजट पेश कर सकती है।
किस पर रहेगा बजट का फोकस? सूत्रों के अनुसार, इस बार बजट में:
- सड़क और पुल निर्माण
- शहरी विकास
- बुनियादी ढांचा
- कानून व्यवस्था
- स्वास्थ्य और शिक्षा
पर बड़ा खर्च किया जा सकता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य विकास को तेज रफ्तार देना और योजनाओं को जमीन पर उतारना बताया जा रहा है।
किसान, युवा, महिला और गरीब पर खास नजर योगी सरकार के इस बजट में:
- किसानों के लिए नई योजनाएं
- युवाओं के रोजगार कार्यक्रम
- महिला सशक्तिकरण स्कीम
- गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए राहत पैकेज
जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट सीधे-सीधे मतदाता वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
विपक्ष की रणनीति भी तैयार
बजट सत्र से पहले सत्ता और विपक्ष की अलग-अलग बैठकें हो रही हैं। सर्वदलीय बैठक में सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने पर चर्चा की जाएगी, लेकिन विपक्ष ने पहले ही सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है। पिछले शीतकालीन सत्र में यूपी एसआईआर और संत अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा काफी गरमाया था। एक बार फिर इन मुद्दों के सदन में उठने की संभावना है।
ये अध्यादेश होंगे पेश
बजट सत्र के दौरान सरकार कई अहम अध्यादेश सदन में पेश करेगी, जिनमें शामिल हैं:
- उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026
- उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026
- उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) अध्यादेश, 2026
- उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2026
- इन पर भी सदन में तीखी बहस होने के आसार हैं।
16 से 20 फरवरी तक विभागीय चर्चा
16 फरवरी से 20 फरवरी तक सदन में अलग-अलग विभागों के बजट प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा होगी। इस दौरान विपक्ष सरकार के खर्च और योजनाओं पर सवाल उठा सकता है, वहीं सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाएगी।
लखनऊ में बदली रहेगी व्यवस्था
बजट सत्र के दौरान लखनऊ की यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदली रहेगी। ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है और विधानसभा के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी। सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन या भीड़ पर सख्त रोक लगाई गई है।
सियासत और विकास का बड़ा मंच
कुल मिलाकर यह बजट सत्र न केवल आर्थिक दिशा तय करेगा, बल्कि 2027 के चुनावी रण की बुनियाद भी रखेगा। ऐसे में आने वाले दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।