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राजधानी लखनऊ में साइबर ठगों ने एक बार फिर अपनी चालाकी और तकनीकी जाल से लोगों को निशाना बनाकर हजारों रुपये की ठगी कर ली। खुद को भागलपुर का डीएसपी बताकर गिरफ्तारी की धमकी देना, सोशल मीडिया पर निजी डेटा वायरल करने की बात कहकर डर पैदा करना, सस्ते ड्राई फ्रूट का लालच और टेलीग्राम पर पेड टास्क के नाम पर निवेश करवाना—इन सब हथकंडों के जरिए ठगों ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया। पुलिस ने सभी मामलों में मुकदमा दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है।

राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। ताजा मामलों में ठगों ने अलग-अलग तरीकों से लोगों को डर और लालच का शिकार बनाकर हजारों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। कहीं पुलिस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का भय दिखाया गया, तो कहीं सस्ते ड्राई फ्रूट और टेलीग्राम पेड टास्क के जरिए लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर आम जनता को निशाना बना रहे हैं।

“मैं भागलपुर का डीएसपी बोल रहा हूं…”

जानकीपुरम विस्तार निवासी शिवम यादव के साथ हुई घटना ने सभी को चौंका दिया। 2 फरवरी को उन्हें एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को भागलपुर का डीएसपी बताया। उसने बेहद सख्त लहजे में कहा कि शिवम के खिलाफ एक गंभीर मामला दर्ज है और पुलिस टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए रवाना हो चुकी है। इतना ही नहीं, जालसाज ने सोशल मीडिया पर उनका निजी डेटा और फोटो वायरल करने की धमकी भी दी। अचानक आई इस कॉल से शिवम घबरा गए। गिरफ्तारी और बदनामी के डर से उन्होंने ठग के बताए खाते में 69 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। पैसे ट्रांसफर होते ही आरोपी का फोन बंद हो गया। जब शिवम को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने जानकीपुरम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल को जांच सौंपी है।

सस्ते ड्राई फ्रूट का झांसा

अलीगंज सेक्टर-बी निवासी और कपूरथला में रेस्टोरेंट संचालक प्रकाश कुमार यादव को सस्ते ड्राई फ्रूट की सप्लाई का लालच दिया गया। ठगों ने उन्हें बाजार से काफी कम कीमत पर काजू-बादाम और अन्य ड्राई फ्रूट उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।व्यापारिक लाभ की उम्मीद में प्रकाश कुमार ने बताए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। लेकिन भुगतान के बाद न तो माल भेजा गया और न ही फोन रिसीव किया गया। कुछ समय बाद मोबाइल नंबर भी बंद हो गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

टेलीग्राम पेड टास्क का जाल

अलीगंज सेक्टर-पी निवासी सरगम सोनी को टेलीग्राम पर एक मैसेज मिला। इसमें घर बैठे पैसे कमाने का ऑफर दिया गया था। शुरुआत में उन्हें गूगल मैप पर कुछ स्थानों के रिव्यू देने के बदले मामूली रकम दी गई, जिससे उनका भरोसा बढ़ गया। इसके बाद उन्हें ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच देकर निवेश करने को कहा गया। सरगम ने कुल 40,200 रुपये ट्रांसफर कर दिए। लेकिन निवेश के बाद न तो कोई लाभ मिला और न ही उनकी रकम वापस की गई। संपर्क करने पर संबंधित अकाउंट और नंबर बंद मिले। यह तरीका आजकल युवाओं और गृहिणियों को तेजी से निशाना बना रहा है, जहां छोटे-छोटे भुगतान कर भरोसा जीतकर बड़ी रकम ठग ली जाती है।

फर्जी बिल प्रोफॉर्मा से ठगी

हजरतगंज क्षेत्र में भी एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। सीतापुर निवासी विनोद कुमार को ड्राई फ्रूट और टीएमटी उत्पादों की सप्लाई के नाम पर एक फर्जी बिल प्रोफॉर्मा भेजा गया। दस्तावेज इतने असली लग रहे थे कि उन्हें शक नहीं हुआ।विनोद कुमार ने 55 हजार रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर कर दी। भुगतान के बाद मोबाइल फोन बंद कर दिया गया। बाद में जांच में पता चला कि पूरा दस्तावेज फर्जी था और ठगों ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया था।

पुलिस की कार्रवाई

लखनऊ पुलिस का कहना है कि सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साइबर सेल की मदद से बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और आईपी एड्रेस की जांच की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ठग अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक अधिकारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों में भय पैदा करते हैं। डर के कारण लोग तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।

कैसे बचें साइबर ठगी से?

  • किसी भी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
  • गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी मिलने पर तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
  • सस्ते ऑफर या ज्यादा मुनाफे का लालच देने वाले मैसेज से सावधान रहें।
  • टेलीग्राम, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर पेड टास्क से बचें।
  • भुगतान करने से पहले कंपनी या व्यक्ति की पूरी जांच करें।

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