दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां बंद कमरे में गैस हीटर जलाकर सो रहे दो युवकों की दम घुटने से मौत हो गई। सर्दी से बचने के लिए की गई एक छोटी सी लापरवाही रातोंरात जानलेवा हादसे में बदल गई। ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस के कारण दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।
नई दिल्ली। सर्दियों में राहत देने वाला हीटर जब लापरवाही के साथ इस्तेमाल किया जाए, तो वही जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है। ऐसा ही दर्दनाक नज़ारा शनिवार सुबह जहांगीरपुरी इलाके में देखने को मिला, जहां एक बंद कमरे में गैस हीटर जलाकर सो रहे दो युवकों की दम घुटने से मौत हो गई। यह हादसा न सिर्फ दो परिवारों को उजाड़ गया, बल्कि इलाके के लोगों को भी झकझोर कर रख गया।
सुबह की खामोशी और पीसीआर कॉल
शनिवार सुबह करीब पुलिस को पीसीआर कॉल मिली कि जहांगीरपुरी के डी-ब्लॉक में एक कमरे के अंदर दो युवक बेहोशी की हालत में पड़े हैं। सूचना मिलते ही जहांगीरपुरी थाना की पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने देखा कि कमरा अंदर से बंद था और भीतर गैस की तीखी गंध फैली हुई थी।
बिस्तर पर बेहोश मिले दोनों युवक
पुलिस ने कमरे का दरवाजा खुलवाया तो अंदर का दृश्य बेहद डराने वाला था। कमरे में गैस से चलने वाला हीटर जल रहा था और दोनों युवक बिस्तर पर बेसुध पड़े थे। बिना समय गंवाए पुलिस ने दोनों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की पहचान
- मृतकों की पहचान
- मुसाफिक आलम (18 वर्ष), पुत्र यूसुफ आलम, निवासी डी-ब्लॉक, जहांगीरपुरी
- रुकसाद आलम (30 वर्ष), पुत्र मुजहारा, निवासी ई-754, जहांगीरपुरी
के रूप में हुई है। दोनों युवक एक-दूसरे के परिचित थे और रोज़गार से जुड़े काम करते थे।
मोमोज बनाने से शुरू हुई रात
शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों युवक रात के समय मोमोज बनाने का काम कर रहे थे। इसके लिए वे गैस से चलने वाले मोमोज हीटर या सिगड़ी का इस्तेमाल कर रहे थे। ठंड अधिक होने के कारण उन्होंने उसी हीटर को बंद कमरे में जलाकर छोड़ दिया और दरवाजा अंदर से बंद कर सो गए।
रातभर रिसती रही ज़हरीली गैस
जानकारी के मुताबिक, रातभर कमरे में गैस का रिसाव होता रहा। बंद कमरे में वेंटिलेशन नहीं होने की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा धीरे-धीरे कम हो गई और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस फैलती चली गई। सोते समय ही दोनों युवकों की सांसें थम गईं और उन्हें इसका एहसास तक नहीं हुआ।
सुबह खुला दरवाजा, उड़ गए होश
सुबह जब परिवार के एक सदस्य ने कमरे का दरवाजा खोला तो अंदर का दृश्य देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों युवक बिस्तर पर पड़े थे और उनके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। शोर मचाया गया, पड़ोसी जुटे और फिर पुलिस को सूचना दी गई।
क्राइम टीम और FSL जांच
पुलिस ने मौके पर क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया। कमरे की बारीकी से जांच की गई। जांच में किसी तरह की मारपीट, संघर्ष, चोरी या संदिग्ध गतिविधि के कोई निशान नहीं मिले। सभी हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि यह घटना पूरी तरह दुर्घटनावश हुई।
आत्महत्या या साजिश की आशंका नहीं
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे आत्महत्या या किसी आपराधिक साजिश की आशंका जताई जा सके। प्राथमिक तौर पर दोनों की मौत कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से दम घुटने के कारण हुई मानी जा रही है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एफएसएल की अंतिम राय आने के बाद ही मौत के कारणों की पूरी पुष्टि होगी। फिलहाल पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
इलाके में मातम और डर
इस हादसे के बाद जहांगीरपुरी इलाके में शोक का माहौल है। दोनों युवकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसियों का कहना है कि दोनों मेहनती और शांत स्वभाव के थे। किसी को अंदेशा भी नहीं था कि एक आम सी रात इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी।
दिल्ली पुलिस की अपील
इस दर्दनाक घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सर्दियों में बंद कमरों के अंदर गैस हीटर, सिगड़ी या किसी भी गैस आधारित उपकरण का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करें। पुलिस का कहना है कि ऐसी लापरवाही हर साल कई जानें ले लेती है।
सावधानी ही बचाव है
- पुलिस और विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि
- बंद कमरे में गैस हीटर या सिगड़ी जलाकर न सोएं
- कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें
- सोने से पहले सभी गैस उपकरण बंद कर दें
- सिर दर्द, चक्कर या उलझन महसूस हो तो तुरंत बाहर जाएं
- एक छोटी सी सतर्कता बड़े हादसे को टाल सकती है।