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भोजीपुरा थाना क्षेत्र के पिपरिया गांव में शनिवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रशासन भारी पुलिस बल और बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंचा। ग्राम समाज की जमीन पर बनी मस्जिद-ए-आला हजरत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई, जिसके चलते पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से शनिवार सुबह एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के पिपरिया गांव में ग्राम समाज की जमीन पर बनी करीब 300 वर्ग गज में फैली मस्जिद-ए-आला हजरत पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में उठाया गया। सुबह होते ही पूरा गांव पुलिस और प्रशासनिक अमले से भर गया। दो बुलडोजर, भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई।

सुबह-सुबह हरकत में आया प्रशासन

शनिवार सुबह प्रशासनिक अमला तय समय पर पिपरिया गांव पहुंचा। अधिकारी पहले से मौके पर मौजूद थे और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद दो बुलडोजरों के जरिए निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई। पूरी कार्रवाई अधिकारियों की निगरानी में की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बने।

नोटिस के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण

जिला प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद जिस भूमि पर बनी थी वह ग्राम समाज की जमीन है। इस संबंध में संबंधित पक्ष को पहले कई बार नोटिस जारी किए गए थे। अतिक्रमण हटाने के लिए समय भी दिया गया, लेकिन तय समयसीमा के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सख्त रुख अपनाया और हाईकोर्ट के आदेश के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का फैसला लिया।

गांव बना पुलिस छावनी

संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे पिपरिया गांव को अस्थायी रूप से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

  • कई थानों की फोर्स
  • पीएसी की तैनाती
  • चप्पे-चप्पे पर निगरानी

किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। प्रशासन का प्रयास रहा कि कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो।

मौके पर रहा तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित माहौल

ध्वस्तीकरण के दौरान इलाके में अफरा-तफरी जैसा माहौल जरूर दिखाई दिया, लेकिन पुलिस की सख्ती और अधिकारियों की मौजूदगी के चलते स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। स्थानीय लोग अपने घरों और गलियों से घटनाक्रम को देखते रहे। प्रशासन ने अपील की थी कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखें।

प्रशासन का पक्ष: पूरी तरह कानूनी कार्रवाई

जिला प्रशासन का साफ कहना है कि यह कार्रवाई—

  • कोर्ट के आदेश पर
  • कानूनी प्रक्रिया के तहत
  • ग्राम समाज की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए

की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, किसी एक धर्म या समुदाय को लक्ष्य बनाकर यह कदम नहीं उठाया गया, बल्कि यह पूरी तरह भूमि विवाद और न्यायिक आदेश से जुड़ा मामला है।

पहले भी हो चुकी है सुनवाई

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पहले भी सुनवाई हो चुकी थी और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया था। आदेश आने के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि वह उसका अनुपालन सुनिश्चित करे।

कार्रवाई के बाद की स्थिति

फिलहाल पिपरिया गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। पुलिस बल को एहतियातन कुछ समय तक इलाके में तैनात रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की शांति भंग की कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा।

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