मुजफ्फरनगर। जिस उम्र में ज़्यादातर महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के आगे अपने सपनों को चुपचाप किनारे रख देती हैं, उसी उम्र में 38 वर्षीय पूजा शर्मा ने किकबॉक्सिंग रिंग में उतरकर इतिहास रच दिया। 10 साल के बेटे की मां पूजा ने 600 खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता और नेशनल चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई कर लिया। यह सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उस सोच पर जोरदार प्रहार है जो कहती है कि खेल सिर्फ युवाओं के लिए होता है।
संयोग से शुरू हुआ खेल का सफर
खतौली के नागर कॉलोनी की रहने वाली पूजा शर्मा एक पब्लिक स्कूल में एडमिन पद पर कार्यरत हैं। अक्टूबर 2025 तक उनका किकबॉक्सिंग से कोई सीधा रिश्ता नहीं था। पूजा बताती हैं कि स्कूल के बच्चों को जिला स्तरीय किकबॉक्सिंग प्रतियोगिता में लेकर जाना ही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया। “जब मैंने खिलाड़ियों का जोश और आत्मविश्वास देखा तो लगा—मैं भी यह कर सकती हूं।” यहीं से एक आम मां के भीतर छुपी खिलाड़ी जाग गई।
स्कूल ने थामा हाथ, अकादमी में हुई असली मेहनत
पूजा के इस फैसले में स्कूल प्रबंधन ने बड़ी भूमिका निभाई। प्रिंसिपल और कोऑर्डिनेटर ने न केवल उन्हें प्रोत्साहित किया, बल्कि आगे बढ़ने का पूरा समर्थन भी दिया। इसके बाद पूजा ने मुजफ्फरनगर की श्री सूर्यदेव अकादमी जॉइन की, जहां कोच मनोज और कोच राखी की देखरेख में कड़ी ट्रेनिंग शुरू हुई।
न नौकरी छोड़ी, न पारिवारिक जिम्मेदारियों से भागीं— बस वक्त को मैनेज किया और पसीना बहाया।
डिस्ट्रिक्ट से स्टेट और फिर ज़ोनल तक का सफर
कोच की सलाह पर पूजा ने सहारनपुर में डिस्ट्रिक्ट लेवल ट्रायल दिया। चयन हुआ तो मेरठ की सुभारती यूनिवर्सिटी में स्टेट लेवल प्रतियोगिता खेली। यहां उन्होंने दो गोल्ड मेडल जीतकर सभी को चौंका दिया। इसके बाद जम्मू में आयोजित नॉर्थ ज़ोन हार्ड वेपन स्टाइल किकबॉक्सिंग प्रतियोगिता में पूजा ने 600 से अधिक खिलाड़ियों के बीच ब्रॉन्ज मेडल जीतकर नेशनल्स का टिकट पक्का कर लिया।
सीनियर कैटेगरी बनी सबसे बड़ी चुनौती
पूजा 19 से 40 वर्ष की सीनियर कैटेगरी में खेल रही थीं। उनके सामने 21–22 साल की तेज़ और अनुभवी खिलाड़ी थीं।
पूजा कहती हैं— “शुरुआत में फर्क साफ दिखता था, लेकिन हार मानना विकल्प नहीं था। मैंने अपनी कमजोरी पहचानी और किक्स व जंपिंग पर दोगुनी मेहनत की।”
मां, नौकरीपेशा और खिलाड़ी—तीनों भूमिकाओं की परीक्षा
पूजा 10 साल के बेटे अभिराज की मां हैं। दिलचस्प बात यह है कि मां-बेटा रोज़ साथ प्रैक्टिस करते हैं।
पूजा मुस्कराते हुए कहती हैं— “जब मैं जीतकर लौटती हूं तो सबसे ज्यादा खुश मेरा बेटा होता है।” पति श्रेय और ससुराल पक्ष ने भी हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।
नेशनल्स से इंटरनेशनल तक का सपना
अब पूजा 24 से 28 मार्च के बीच चेन्नई में होने वाली नेशनल किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगी। उनका लक्ष्य सिर्फ नेशनल तक सीमित नहीं है—वे इंटरनेशनल लेवल पर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं।
महिलाओं के लिए मजबूत संदेश
पूजा शर्मा का कहना है—“हर महिला को फिटनेस और आत्मरक्षा सीखनी चाहिए। वक्त लगेगा, लेकिन अगर इरादा हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।”