नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की ताकत जल्द ही कई गुना बढ़ने वाली है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नौसेना को देश की पहली ‘मेड इन इंडिया’ हथियारबंद अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट मिलने जा रही है। यह स्वदेशी तकनीक न सिर्फ समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि दुश्मन देशों के लिए एक कड़ा रणनीतिक संदेश भी होगी।
Enemies on Alert: Indian Navy to Induct Made-in-India Unmanned Interceptor Craft Soon
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटा है। इसी कड़ी में भारतीय नौसेना को जल्द ही देश की पहली ‘मेड इन इंडिया’ हथियारबंद अनमैन्ड फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (Unmanned Interceptor Craft) मिलने जा रही है। यह कदम न सिर्फ भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ को भी और सख्त बनाएगा। पुणे स्थित डिफेंस स्टार्टअप सागर डिफेंस इंजीनियरिंग द्वारा विकसित यह अत्याधुनिक मानवरहित इंटरसेप्टर क्राफ्ट पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। सूत्रों के मुताबिक, इन क्राफ्ट्स का पहला बैच भारतीय नौसेना को सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इन्हें पश्चिमी तट पर रणनीतिक तैनाती के लिए भेजा गया है।
क्यों खास है यह अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट?
यह कोई सामान्य नौका नहीं है। यह एक ऑटोमेटिक, हथियारबंद और हाई-स्पीड अनमैन्ड फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट है, जिसे विशेष रूप से तटीय सुरक्षा, गश्त, त्वरित प्रतिक्रिया और हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इन क्राफ्ट्स की सबसे बड़ी ताकत यह है कि ये बिना किसी क्रू के दुश्मन पर नजर रख सकती हैं, हमला कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर एक साथ कई वेसल्स के झुंड यानी Vessel Swarm के रूप में काम कर सकती हैं।
भारत में ही डिजाइन, डेवलप और मैन्युफैक्चर
यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के iDEX–DIO फ्रेमवर्क के तहत आत्मनिर्भर भारत की सोच का मजबूत उदाहरण है।
नौसेना ने 5 जनवरी 2022 को सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के साथ 12 हथियारबंद अनमैन्ड फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स की डील साइन की थी। इन क्राफ्ट्स को:
- भारत में डिजाइन किया गया
- भारत में डेवलप किया गया
- और भारत में ही मैन्युफैक्चर किया गया
- इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।
कैसे बढ़ेगी भारतीय नौसेना की ताकत?
इन अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता में कई गुना इजाफा होगा।
- ये क्राफ्ट्स 400 नॉटिकल मील (लगभग 800 किमी) तक ऑपरेट कर सकती हैं
- तटीय इलाकों में बेहद तेजी से पहुंच सकती हैं
- संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकती हैं
- रेस्क्यू और इवैक्यूएशन मिशन में इस्तेमाल हो सकती हैं
खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर यह क्राफ्ट 14 से अधिक कर्मियों को ले जाने में भी सक्षम है।
हथियारबंद स्वार्म टेक्नोलॉजी में एंट्री
इन क्राफ्ट्स की सबसे बड़ी रणनीतिक खासियत है स्वार्म टेक्नोलॉजी।
इसका मतलब है कि कई अनमैन्ड वेसल्स एक साथ समन्वित तरीके से ऑपरेट कर सकती हैं, जिससे दुश्मन को चकमा देना और मुश्किल हो जाता है। इस टेक्नोलॉजी के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनके पास हथियारबंद अनमैन्ड वेसल स्वार्म की क्षमता है।
विदेशी निर्भरता से आज़ादी
अब तक भारतीय नौसेना को इजरायल से आयात की गई अनमैन्ड सरफेस वेसल्स पर निर्भर रहना पड़ता था, जो मुख्य रूप से माइन काउंटर-मेजर ऑपरेशनों तक सीमित थीं।
- लेकिन मेड इन इंडिया अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट के आने से:
- स्वदेशी समाधान मिलेगा
- ऑपरेशन की रेंज बढ़ेगी
- और युद्ध जैसी परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई संभव होगी
दुश्मनों के लिए बड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक नई टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और समुद्री चुनौतियों के बीच यह कदम भारत की समुद्री सीमा को और अभेद्य बना देगा। यह कहना गलत नहीं होगा कि इन अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स की एंट्री से भारत की नौसेना युद्ध की परिभाषा बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रही है।