विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर समाजवादी पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। बरेली में गुटबाजी, संगठनात्मक अनदेखी और प्रशिक्षण शिविरों की अव्यवस्था की रिपोर्ट सीधे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचते ही नेतृत्व ने सख्त कदम उठाया। नतीजतन बरेली के एसआईआर प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव वीरपाल सिंह यादव को हटाकर नई जिम्मेदारी सौंप दी गई, जबकि जिले की कमान शशांक यादव को दी गई है।
बरेली। समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक एकजुटता को लेकर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई है। इस बार विवाद की जड़ बना है विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान, जिसे पार्टी ने आगामी चुनावी रणनीति की रीढ़ माना था। लेकिन बरेली में यह अभियान संगठन की कमजोरी और गुटबाजी का आईना बन गया।
एसआईआर: रणनीति या संगठन की परीक्षा?
एसआईआर के तहत समाजवादी पार्टी ने बूथ लेवल ऑफिसर की तर्ज पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए थे। इन एजेंटों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, घर-घर सत्यापन कराने, फार्म-6, 7 और 8 भरवाने तथा आपत्तियों के निस्तारण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उद्देश्य साफ था—मतदाता आधार मजबूत करना।
वीरपाल यादव को मिली थी अहम जिम्मेदारी
बरेली और पीलीभीत जिलों के लिए राष्ट्रीय सचिव और पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव को एसआईआर प्रभारी बनाया गया था। निर्देश थे कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में बीएलए प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया जाए। लेकिन जमीनी हकीकत उम्मीदों से उलट निकली।
जिलाध्यक्ष को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
जिले की नौ विधानसभा सीटों में शहर और कैंट क्षेत्रों में आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में जिलाध्यक्ष को आमंत्रित नहीं किया गया। यहीं से संगठन की पुरानी गुटबाजी फिर उभर आई। महानगर इकाई और जिला इकाई के बीच खिंची लकीरें और गहरी हो गईं।
प्रशिक्षण शिविर बने औपचारिकता
सूत्रों के मुताबिक, कई बूथों से निर्धारित संख्या में बीएलए प्रशिक्षण में पहुंचे ही नहीं। कहीं सूचना का अभाव रहा, तो कहीं जानबूझकर अनदेखी की गई। नतीजा यह हुआ कि एसआईआर जैसे अहम अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई और रिपोर्ट नकारात्मक बनती चली गई।
नगर निगम राजनीति की भी छाया
पार्टी के अंदरखाने की मानें तो नगर निगम कार्यकारिणी समिति में नामों को लेकर पहले से चल रही सियासी तनातनी ने इस विवाद को और हवा दी। एसआईआर सिर्फ बहाना बना, असली टकराव सत्ता संतुलन और प्रभाव को लेकर था।
रिपोर्ट पहुंची अखिलेश यादव तक
जैसे ही शिविरों की अव्यवस्था और गुटबाजी की रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंची, नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लिया। संगठन को साफ संदेश देने के लिए तत्काल कार्रवाई का फैसला हुआ।
वीरपाल यादव हटे, शशांक यादव को कमान
अखिलेश यादव ने बरेली के एसआईआर प्रभारी वीरपाल सिंह यादव को हटाकर लखीमपुर जिले की जिम्मेदारी दे दी। वहीं बरेली की कमान पूर्व एमएलसी शशांक यादव को सौंप दी गई है। यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सियासी संदेश भी माना जा रहा है।
शशांक यादव के सामने बड़ी चुनौती
नई जिम्मेदारी संभालते ही शशांक यादव को ब्लॉक प्रभारियों को सक्रिय करने, वोट निर्माण की गति तेज करने और एसआईआर अभियान को पटरी पर लाने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि अब किसी भी स्तर पर गुटबाजी अभियान में बाधा न बने।
कौन हैं शशांक यादव?
शशांक यादव लखीमपुर खीरी के निवासी हैं। वे पूर्व में एमएलसी रह चुके हैं और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। संगठनात्मक अनुभव और नेतृत्व के भरोसे उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी गई है।
संदेश साफ: संगठन पहले
इस पूरे घटनाक्रम से समाजवादी पार्टी ने साफ कर दिया है कि चुनावी तैयारी में अनुशासन सर्वोपरि है। गुटबाजी, अनदेखी और आपसी टकराव को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसआईआर अभियान पार्टी के लिए केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संगठन की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है।