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लखनऊ: स्टार्टअप इंडिया पहल के 10 वर्ष पूरे होने के साथ उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप और उद्यमिता की यात्रा को नए सिरे से देखा जा रहा है, पिछले नौ सालों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम जिस प्रभावशाली ढंग से बदला है उसने उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप वाले राज्यों की कतार में खड़ा कर दिया है। आज प्रदेश में हजारों मान्यता प्राप्त स्टार्टअप सक्रिय हैं, वहीं निवेश, रोजगार और नवाचार के नए अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम के मामले में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। सॉफ्टवेर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ़ इंडिया (एसटीपीआई) नोएडा के डायरेक्टर, डॉ संजय गुप्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कारोबारी सुगमता और वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से राष्ट्रीय स्टार्टअप और नवाचार केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने से पहले उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप को लेकर कोई स्पष्ट नीति या मजबूत इकोसिस्टम नहीं था। अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में कुछ आईटी पार्क आदि को लेकर कुछ योजनाएं जरूर सामने आईं थीं, लेकिन वे अधिकतर कागजों तक सीमित रहीं। उस समय स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के लिए न तो वित्तीय सहायता का ठोस ढांचा था और न ही मेंटरशिप, इनक्यूबेशन या बाजार तक पहुंच का कोई व्यापक रोडमैप। कुल मिलकर इस प्रकार के विकास को धरातल पर लाने की अखिलेश यादव वाली सरकार की नीयत ही हैं थी। युवा उद्यमियों को उस समय मजबूरन दिल्ली, बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे शहरों की ओर रुख करना पड़ता था।

वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप को विकास की धुरी के रूप में देखा गया। सरकार ने सबसे पहले नीति स्तर पर बदलाव किए। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति लागू की गई जिसमें पंजीकरण से लेकर वित्तीय सहायता तक की स्पष्ट व्यवस्था की गई। स्टार्टअप्स को सीड फंडिंग, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान और मार्केटिंग सपोर्ट जैसे प्रावधान प्रदान किये गए। इससे युवाओं का भरोसा बढ़ा और स्थानीय स्तर पर उद्यम शुरू करने की प्रवृत्ति सुदृढ़ हुई।

योगी सरकार में स्टार्टअप केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहे, यह कृषि, स्वास्थ्य शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और ग्रामीण आधारित नवाचारों को भी समान महत्व दिया गया। विशेष रूप से वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के साथ स्टार्टअप्स को जोड़कर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा गया। इससे पारंपरिक कारीगरों और लघु उद्यमियों को भी स्टार्टअप इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का अवसर मिला। प्रदेश सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दिया। लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में इनक्यूबेशन सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए। आईआईटी, आईआईएम और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहित किया गया। इससे अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच की दूरी कम हुई।

यदि निवेश के मोर्चे की बात करें तो यहाँ भी उत्तर प्रदेश बड़े बदलाव का गवाह बना है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के माध्यम से स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने का मंच मिला। इसका परिणाम यह हुआ कि देश-विदेश से वेंचर कैपिटल और एंजेल निवेशकों की रुचि उत्तर प्रदेश में बढ़ी। आज प्रदेश में कई यूनिकॉर्न और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स मौजूद हैं, जो रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था में सुधार को भी स्टार्टअप ग्रोथ का आधार माना गया। सुरक्षित माहौल, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रशासनिक पारदर्शिता ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में उत्तर प्रदेश की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है। जिससे स्टार्टअप्स को लाइसेंस, परमिट और अनुपालन की प्रक्रिया में आसानी मिली है।

प्रदेश की पिछली सरकार (अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार) के समय स्टार्टअप शब्द का इस्तेमाल तो होने लगा था, लेकिन वह किसी व्यापक विजन से जुड़ा नहीं था। इसके विपरीत योगी सरकार ने स्टार्टअप को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ा। युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाने की सोच को आगे बढ़ाया। स्टार्टअप इंडिया के 10 साल पूरे होने के अवसर पर उत्तर प्रदेश यह प्रमाणित करता है कि योगी सरकार ने नौ सालों में अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीति से एक बड़े और विविधतापूर्ण प्रदश में भी मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम खड़ा किया जा सकता।

स्टार्टअप इकोसिस्टम सशक्तिकरण में आईआईटी कानपुर की अहम भूमिका
फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सीओओ एवं सीएफओ पियूष मिश्रा का कहना है कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम के सशक्तिकरण में आईआईटी कानपुर स्थित टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (टीबीआई) के अंतर्गत फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (फर्स्ट) अहम भूमिका निभा रहा है। फर्स्ट ने लगभग 521 प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है। जिनमें 150 से अधिक महिला नेतृत्व वाले उद्यम शामिल हैं। इन स्टार्टअप्स का संयुक्त मूल्यांकन 13,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इन उपक्रमों ने संयुक्त रूप से 6,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। जिनमें लगभग 1000 रोजगार के अवसर महिलाओं को प्राप्त हुए है।

क्या है स्टार्टअप इंडिया

स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 16 जनवरी, 2016 को किया गया। इसे एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में आरंभ किया गया। इसका उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहन देना, उद्यमिता को बढ़ावा देना और निवेश आधारित विकास को अत्यधिक सक्षम बनाना रहा है, ताकि भारत को उद्यमिता वाला देश बनाया जा सके। स्टार्टअप इंडिया भारत की आर्थिक और नवाचार संरचना का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।

उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप से संबंधित आंकड़े

  • -उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इंडिया के अंतर्गत कुल स्टार्टअप्स की संख्या 19 हजार से अधिक
  • -प्रदेश में 9000 से अधिक स्टार्टअप का संचालन महिलाएं कर रही हैं
  • -प्रदेश में वर्तमान कुल इन्क्यूबेशन सेंटर की संख्या 76, इसकी संख्या 100 करने का लक्ष्य
  • -प्रदेश में कुल सेंटर ऑफ़ एक्सिलेंस 07
  • -स्टार्टअप इकोसिस्टम के मामले में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

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