bareillyकार्यक्रम के दौरान पूर्व आईजी को किया गया सम्मानित।

बरेली। हिंदी दिवस पर बरेली में साहित्य, कविता और भाषा के भविष्य पर मंथन हुआ। रचनात्मक लेखन मंच न्यास, वाराणसी की बरेली उप शाखा की ओर से उत्कर्ष स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित समारोह में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। पूर्व आईजी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, नई पीढ़ी इसे आत्मविश्वास के साथ वैश्विक पटल पर आगे बढ़ा रही है।

समारोह में आयोजित काव्य सत्र आकर्षण का केंद्र रहा। कवि शान, गरिमा भारद्वाज, डॉ. अखिलेश गुप्ता और अमित गुप्ता ने अपनी रचनाएं सुनाईं। अधिवक्ता गौरव सिंह राठौड़ ने हिंदी के सांस्कृतिक महत्व और समसामयिक संदर्भों पर विचार रखे। काव्य प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल मिश्रा ने किया।

हिंदी हमारी सामूहिक पहचान की आधारशिला

समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् सुरेश बाबू मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और सामूहिक पहचान की महत्वपूर्ण आधारशिला है। हिंदी और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए रचनात्मक लेखन मंच न्यास के प्रयासों की उन्होंने सराहना की। मुख्य अतिथि पूर्व आईजी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने हिंदी को नई पीढ़ी की पहचान और गौरव बताया। उन्होंने संस्कृत और हिंदी के सदियों पुराने संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी की सुवास बनारस से बरेली तक जनमानस में पहुंच चुकी है। नई पीढ़ी हिंदी को अपनी अस्मिता के रूप में स्वीकार करते हुए दुनिया तक पहुंचा रही है।

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बैनर का विमोचन, नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी

डॉ. विनीता सिंह ने रचनात्मक लेखन मंच न्यास की बरेली शाखा और संस्था के साहित्यिक-सामाजिक उद्देश्यों की जानकारी दी। समारोह में रचनात्मक लेखन मंच न्यास, वाराणसी और भारतीय नव संस्कृति साहित्य संघ को संयुक्त रूप से गठित किए जाने की घोषणा भी की गई। मुख्य अतिथि ने संस्था के बैनर का विमोचन किया। डॉ. विनीता सिंह को उत्तर प्रदेश यूनिट का सचिव घोषित किया गया। डॉ. अखिलेश गुप्ता, गरिमा भारद्वाज, योगेंद्र पटेल और प्रत्यूष वत्सला उपाध्याय को नियुक्ति पत्र देकर संस्था की सदस्यता दिलाई गई।

हिंदी को लोकल से ग्लोबल बनाने पर जोर

मुख्य वक्ता शिक्षक क्लासेज ऑफ एजुकेशन, प्रयागराज की निदेशक प्रत्यूष वत्सला उपाध्याय ने हिंदी की वैज्ञानिकता, समृद्ध व्याकरण और वैश्विक स्वीकार्यता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिंदी को लोकल से ग्लोबल बनाने में नई पीढ़ी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष प्रिय ने हिंदी और अर्थव्यवस्था के संबंध पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यापार और भाषा का गहरा संबंध है। हिंदी को आर्थिक और व्यावसायिक स्तर पर मजबूत करने से वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर हिंदी के बढ़ते इस्तेमाल को सकारात्मक बदलाव बताया।

करीब 40 प्रतिभाओं को किया सम्मानित

कार्यक्रम में साहित्य, कला और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी करीब 40 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इनमें बरेली बार एसोसिएशन से जुड़े गौरव राठौड़, नदीम सिद्दीकी, आशिक और उमेश चंद्र गुप्ता समेत विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल रहे। अतिथियों और रचनाकारों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। उत्कर्ष संस्थान के चेयरमैन नरेंद्र सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहयोग का भरोसा दिया। संस्थान के डायरेक्टर (M&R) डॉ. केके सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।

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