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bareillyऐप लॉन्च करते डीआईजी व मौजूद अन्य लोग।

बरेली। सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और उनकी जान बचाने की दिशा में एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज ने नई पहल की है। विश्व ट्रामा दिवस के अवसर पर शनिवार को डीआईजी अजय साहनी ने कॉलेज में ट्रामा रजिस्ट्री एंड एंबुलेंस ऐप ‘जीवन रक्षक’ लॉन्च किया। एमबीबीएस छात्रों द्वारा तैयार इस ऐप की मदद से घायलों को एंबुलेंस की सुविधा मिलने के साथ अस्पताल पहुंचने से पहले चिकित्सकीय सलाह भी मिल सकेगी। इस दौरान डीआईजी ने बरेली मंडल के सभी जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिलाने की घोषणा की। प्रशिक्षण की शुरुआत डायल 112 की टीम में तैनात पुलिसकर्मियों से होगी।

एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में डीआईजी अजय साहनी ने बढ़ते सड़क हादसों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हादसों को रोकने के लिए यातायात नियमों के प्रति जागरूकता जरूरी है, लेकिन दुर्घटना के बाद घायल को समय पर उपचार मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे को गोल्डन ऑवर कहा जाता है। इस दौरान घायल को प्राथमिक उपचार और अस्पताल की सुविधा मिलने से उसकी जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। डीआईजी ने कहा कि सड़क हादसों में पुलिसकर्मी अक्सर सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि उन्हें प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाए तो वे एंबुलेंस आने से पहले घायल की मदद कर सकते हैं। इसके लिए एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी एवं ट्रामा टीम के सहयोग से मंडल के पुलिसकर्मियों को फर्स्ट रेस्पॉन्डर कोर्स में प्रशिक्षित किया जाएगा।

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मोबाइल पर दिखेगी एंबुलेंस की लोकेशन

कार्यक्रम में एमबीबीएस छात्र अमृत पुंडीर और यश ने ‘जीवन रक्षक’ ऐप की विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐप के माध्यम से आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस की सहायता ली जा सकेगी। इसके साथ ही एंबुलेंस की ऑनलाइन लोकेशन और उसके घटनास्थल तथा अस्पताल तक पहुंचने के संभावित समय की जानकारी भी मिलेगी। ऐप के जरिए घायल मरीज से संबंधित जानकारी अस्पताल को पहले ही भेजी जा सकेगी। इससे मरीज के पहुंचने से पहले चिकित्सकों की टीम आवश्यक तैयारियां कर सकेगी और अस्पताल पहुंचते ही उपचार शुरू किया जा सकेगा। एंबुलेंस आने तक अस्पताल के प्रशिक्षित चिकित्सकों की सलाह से प्राथमिक उपचार में भी मदद मिल सकेगी।

अभी एसआरएमएस की एंबुलेंस से जुड़ा ऐप

एसआरएमएस के डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन आदित्य मूर्ति ने बताया कि ‘जीवन रक्षक’ ऐप को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संस्थान की सभी एंबुलेंस से जोड़ा गया है। जल्द ही इसे बरेली के साथ अन्य शहरों के लोगों के लिए भी निशुल्क उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने बताया कि संस्थान में इमरजेंसी एवं ट्रामा सेवाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। भविष्य में विभाग को 100 बेड वाले ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि गंभीर रूप से घायल अधिक से अधिक मरीजों को उपचार मिल सके।

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पीलीभीत, बदायूं और बरेली के स्कूली बच्चों को भी दिया प्रशिक्षण

ट्रामा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. हर्षित अग्रवाल ने बताया कि 12 अक्टूबर से शुरू हुए ट्रामा वीक के दौरान पीलीभीत, बदायूं, किच्छा और बरेली के विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें दसवीं कक्षा से ऊपर के विद्यार्थियों को हादसों के दौरान प्राथमिक उपचार देने का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद घायल की जान बचाने के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि आसपास मौजूद लोग प्राथमिक उपचार की सही जानकारी रखते हों तो एंबुलेंस और चिकित्सकीय सहायता मिलने तक घायल की स्थिति संभालने में मदद मिल सकती है।

पुलिस से बचने के लिए नहीं, अपनी सुरक्षा के लिए पहनें हेलमेट

कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सड़क सुरक्षा और हादसों के बाद बरती जाने वाली सावधानियों पर चर्चा की। न्यूरो सर्जन डॉ. शशांक साह ने लोगों को यातायात नियमों के पालन की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जान की सुरक्षा के लिए करना चाहिए। डॉ. एसके राय ने वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखने की सलाह दी। वहीं, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अपसर खान ने कहा कि सड़क हादसा होने पर वीडियो या रील बनाने के बजाय घायल की मदद करनी चाहिए और तत्काल पुलिस को सूचना देकर उसे अस्पताल पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए।

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गंभीर हादसों से उबरकर लौटे मरीजों ने सुनाई आपबीती

विश्व ट्रामा दिवस पर एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में उपचार के बाद स्वस्थ हुए मरीजों को डीआईजी अजय साहनी ने सम्मानित किया। इस दौरान मरीजों ने अपने हादसों और उपचार के अनुभव साझा किए। खटीमा निवासी अनिकेत यादव ने बताया कि ट्रैक्टर से हुए हादसे में उनके पेट में गंभीर चोट आई थी और आंतों में रक्तस्राव हो रहा था। एसआरएमएस में ऑपरेशन के बाद उनकी जान बच सकी। कासगंज निवासी आशीष ने बताया कि सड़क हादसे में उनके पैंक्रियाज में गंभीर चोट आई थी। अस्पताल में ऑपरेशन के आठ दिन बाद उन्हें छुट्टी मिल गई। बरेली के सुभाषनगर निवासी अविरल सक्सेना ने बताया कि तीन महीने पहले स्कूटी फिसलने से उनका चेहरा और हाथ गंभीर रूप से घायल हो गए थे तथा पैर की हड्डी टूट गई थी। एसआरएमएस में उपचार के बाद वह दो महीने में दोबारा काम पर लौट सके। हल्द्वानी निवासी जगदीश, रामपुर के स्वार निवासी नरेश कुमार और नेपाल निवासी शिवम पंत ने भी गंभीर हादसों के बाद मिले उपचार के अनुभव साझा किए। सभी ने चिकित्सकों का आभार जताया।

क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को किया सम्मानित

कार्यक्रम में विश्व ट्रामा दिवस के अवसर पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमएस बुटोला ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर चिंता जताते हुए समय पर उपचार की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम के अंत में ट्रामा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. एसके राय ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. हर्षिता अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर देविशा मूर्ति, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरपी सिंह, डीन यूजी डॉ. बिंदु गर्ग, डॉ. मिलन जायसवाल, डॉ. वंदना नेगी, डॉ. विश्वजीत सिंह सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सक और फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे।

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