बरेली। सिविल लाइंस इलाके में मकान खाली कराने के विवाद में हुई फायरिंग के करीब 14 साल पुराने मामले में अदालत ने दो सगे भाइयों को दोषी करार दिया है। अपर जिला जज प्रथम विजेंद्र त्रिपाठी की अदालत ने आरोपी जसप्रीत ग्रेवाल और तरनप्रीत ग्रेवाल को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मकान खाली कराने को लेकर हुआ था विवाद
डीजीसी क्राइम रीतराम राजपूत और एडीजीसी क्राइम सुनील पांडेय के मुताबिक, बिल्डर नितिन जायसवाल ने कोतवाली बरेली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसने निर्मल सिंह ग्रेवाल से सिविल लाइंस स्थित एक मकान खरीदा था। घटना 20 अक्टूबर 2012 की शाम करीब छह बजे की है। नितिन जायसवाल के भतीजे अमर सिंह को निर्मल ग्रेवाल और उनके बेटे जसप्रीत व तरनप्रीत ने मकान खाली कराने को लेकर कथित तौर पर पीटा और धमकाया।
अगले दिन घर में घुसकर की गई फायरिंग
शिकायत के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलने के बाद नितिन जायसवाल उसी रात अपने भाई सचिन जायसवाल, मित्र गौरव चौहान, नौकर भगवानदास और वीरबहादुर के साथ घर पहुंचे। आरोप था कि 21 अक्टूबर 2012 की सुबह करीब छह बजे निर्मल ग्रेवाल और उनके बेटे जसप्रीत व तरनप्रीत हाथों में रिवॉल्वर और पिस्तौल लेकर घर में घुस आए और फायरिंग कर दी। मामले में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने जसप्रीत और तरनप्रीत को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।