लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है। तीन सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद अब उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी मुक्त कर दिया गया है। मायावती ने आकाश पर पार्टी और बहुजन मूवमेंट से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को तरजीह देने का आरोप लगाया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ हैं।
पहले पद गया, अब पार्टी से भी छुट्टी
बसपा में आकाश आनंद को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार उठापटक चल रही थी। तीन सितंबर को मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटा दिया था। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज थीं। अब मायावती ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है।
ससुर ने लिया संन्यास, फिर भी नहीं बची आकाश की कुर्सी
आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार को राजनीति से संन्यास लेने का एलान किया। इससे पहले मायावती ने साफ संकेत दिया था कि अगर अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छोड़कर राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेते हैं, तभी आकाश आनंद के लिए पार्टी में सक्रिय भूमिका का रास्ता खुल सकता है। अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। मायावती ने कहा कि यह फैसला काफी पहले लिया जाना चाहिए था। अगर अशोक सिद्धार्थ समय रहते राजनीति से अलग हो गए होते तो बसपा, बहुजन मूवमेंट और आकाश आनंद को लगातार मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
मायावती ने उठाया सवाल- ‘डबल माइंड’ से कैसे होगा पार्टी का भला
मायावती की नाराजगी आकाश आनंद के सोशल मीडिया रुख को लेकर भी सामने आई। उनका कहना है कि आकाश पहले उनकी पोस्ट को नियमित रूप से रिपोस्ट करते थे, लेकिन अशोक सिद्धार्थ से संबंधित पोस्ट को उन्होंने रिपोस्ट नहीं किया। मायावती ने इसे आकाश की पारिवारिक रिश्तों और पार्टी के बीच असमंजस की स्थिति से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जो व्यक्ति ‘डबल माइंड’ होकर काम करेगा, वह पार्टी और बहुजन मूवमेंट का भला कैसे कर सकता है।
अशोक सिद्धार्थ की नीयत पर भी मायावती ने उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें वास्तव में अपने दामाद आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और बहुजन मूवमेंट की चिंता होती तो वह पहले ही राजनीति से किनारा कर लेते। मायावती ने साफ संदेश दिया कि पार्टी में निजी और पारिवारिक हितों से ऊपर संगठन और मूवमेंट को रखा जाएगा।
2027 से पहले बसपा में बड़ा संदेश
आकाश आनंद पर कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछने लगी है। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोधियों के राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करने और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर आगे बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ चुनावी तैयारियों में जुटने का संदेश दिया है।