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बरेली। जिले के स्वास्थ्य विभाग में सामने आ रही अनियमितताओं ने विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। सील अस्पताल में नए नाम से पंजीकरण, अस्पतालों के संचालन और डॉक्टरों की तैनाती से जुड़े मामलों ने व्यवस्था की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। सवाल है कि इन मामलों में चूक कहां हुई और जिम्मेदारी कैसे तय होगी?

सील भवन में दूसरे नाम से पंजीकरण

खुसरो अस्पताल को मानकों में कमी के चलते सील किए जाने के बाद उसी भवन में एचए खुसरो हॉस्पिटल के नाम से पंजीकरण का मामला सामने आया था। वर्ष 2024 में जांच के बाद पंजीकरण निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई। इस प्रकरण ने पंजीकरण प्रक्रिया, रिकॉर्ड के सत्यापन और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।

सीलिंग कार्रवाई में समन्वय पर सवाल

एक अस्पताल पर अलग-अलग अधिकारियों द्वारा सील लगाने का मामला भी चर्चा में रहा। इससे विभागीय समन्वय और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठे। जरूरी है कि पहली कार्रवाई, दोबारा सील लगाने की वजह और संबंधित अधिकारियों के बीच हुए पत्राचार की स्थिति स्पष्ट की जाए।

अस्पतालों के संचालन की निगरानी

जिले में अस्पतालों और क्लीनिकों के पंजीकरण, पैथोलॉजी संचालन तथा बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में नियमित निरीक्षण, नियमों का पालन और उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। आधिकारिक आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने संस्थानों पर कार्रवाई हुई और कितनों की जांच लंबित है।

डॉक्टरों की तैनाती पर उठे सवाल

कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर जूनियर डॉक्टरों को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी जैसे पदों पर तैनात करने को लेकर भी सवाल उठे हैं। वर्ष 2015 के शासनादेश और संबंधित सेवा नियमों के अनुरूप तैनातियों की समीक्षा जरूरी है, ताकि वरिष्ठता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विवादों का समाधान हो सके।

हाईकोर्ट के आदेश ने खींचा ध्यान

दिसंबर 2025 में स्टाफ नर्स को हटाने से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा संबंधित आदेश निरस्त किए जाने का मामला भी सामने आया। इस प्रकरण में न्यायालय के आदेश के अनुरूप प्रक्रिया की समीक्षा और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।

पारदर्शी जांच से तय हो जवाबदेही

स्वास्थ्य सेवाएं सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी हैं। ऐसे में पंजीकरण, सीलिंग, तैनाती और निरीक्षण से संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। रिकॉर्ड सार्वजनिक कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कहां प्रक्रियागत चूक हुई और सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए। व्यक्तिगत आरोपों से आगे बढ़कर व्यवस्था की कमियों को दूर करना ही विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखने का रास्ता है।

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