बरेली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन की कमजोर कड़ियों को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरियों को पाटने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा की नई क्षेत्रीय कमेटी के गठन और हालिया राज्यसभा उम्मीदवारी तथा सांसदों के निर्वाचन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाओं ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इसी बीच भाजपा ने बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं समेत ब्रज क्षेत्र की 65 विधानसभा सीटों पर एक-एक विस्तारक तैनात कर दिया है। पार्टी की इस रणनीति को मिशन 2027 की चुनावी तैयारियों के साथ संगठन के भीतर नाराज कार्यकर्ताओं को साधने और स्थानीय स्तर पर उभरते मतभेदों को दूर करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
भाजपा की नई क्षेत्रीय कमेटी में जिम्मेदारियों के बंटवारे और राज्यसभा की उम्मीदवारी को लेकर संगठन के कुछ हिस्सों में नाराजगी की चर्चाएं हैं। राजनीतिक हलकों में इसे कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और संगठनात्मक फैसलों के बीच बढ़ती दूरी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, असंतोष के दायरे और उसके कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विस्तारकों की तैनाती को केवल बूथ मजबूत करने की सामान्य प्रक्रिया के बजाय संगठनात्मक संवाद बढ़ाने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।
बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं में भाजपा के सामने बूथ प्रबंधन के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की चुनौती है। विस्तारकों को विधानसभा क्षेत्रों में लगातार प्रवास कर बूथ अध्यक्षों, पन्ना प्रमुखों और स्थानीय पदाधिकारियों के साथ बैठकें करनी होंगी। इस दौरान निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, स्थानीय समस्याओं की जानकारी जुटाने और संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर रहेगा। पार्टी के भीतर यदि कहीं नाराजगी या आपसी मतभेद हैं तो विस्तारकों के माध्यम से उनकी जानकारी क्षेत्रीय नेतृत्व तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार होगा।
भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी के अनुसार ब्रज क्षेत्र की सभी 65 विधानसभा सीटों पर विस्तारकों की नियुक्ति की गई है। चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें संबंधित क्षेत्रों में भेजा गया है। लगातार दौरे और प्रवास के लिए बाइक भी उपलब्ध कराई गई हैं। विस्तारक क्षेत्रीय संगठक अभय गिरि के मार्गदर्शन में काम करेंगे। इस व्यवस्था के जरिए शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों को बूथ स्तर तक पहुंचाने और जमीनी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को संगठन तक लाने पर जोर दिया जाएगा।
एमएलसी चुनाव के दौरान शुरू हुई इस सांगठनिक कवायद का दीर्घकालिक लक्ष्य विधानसभा चुनाव 2027 बताया जा रहा है। भाजपा चुनावी तैयारियों को केवल प्रत्याशियों और जनसभाओं तक सीमित रखने के बजाय बूथ अध्यक्षों और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके लिए विस्तारकों को मतदाताओं से संपर्क, नियमित बैठकों और बूथ कमेटियों के कामकाज की जिम्मेदारी दी गई है।
सियासी दृष्टि से इस पूरी कवायद का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चुनाव से पहले किसी भी दल के लिए संगठनात्मक एकजुटता और कार्यकर्ताओं की सक्रियता अहम होती है। बरेली मंडल के चारों जिलों में विस्तारकों की भूमिका केवल बूथों की स्थिति जानने तक सीमित रहेगी या वे कार्यकर्ताओं की नाराजगी और स्थानीय गुटबाजी को कम करने में भी प्रभावी भूमिका निभाएंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
फिलहाल भाजपा की 65 विधानसभा सीटों पर विस्तारकों की तैनाती ने यह संकेत जरूर दिया है कि पार्टी मिशन 2027 के लिए जमीनी संगठन को अभी से सक्रिय करने में जुट गई है। नई क्षेत्रीय कमेटी और राज्यसभा की राजनीतिक गतिविधियों के बाद उठ रहे असंतोष के सवालों के बीच अब सबसे बड़ी कसौटी यह होगी कि संगठन बूथों को मजबूत करने के साथ कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा और तालमेल कितना बढ़ा पाता है।