मूवी मिर्जापुर

वेब सीरीज के आठ साल पुराने किरदारों को नए अंदाज में लेकर आई फिल्म; पंकज त्रिपाठी का दबदबा बरकरार, एक्शन और सीटीमार दृश्यों से फैंस को मिला फुल मसाला एंटरटेनमेंट

नई दिल्ली। ओटीटी की दुनिया में अपराध, सत्ता और बदले की कहानी से अलग पहचान बनाने वाली ‘मिर्जापुर’ अब बड़े पर्दे पर पहुंच गई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ में कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भइया जैसे चर्चित किरदार फिर अपने पुराने तेवर में दिखाई देते हैं। वहीं रवि किशन की एंट्री कहानी में नया संघर्ष लेकर आती है। एक्शन, गैंगवार, दमदार संवाद और सीटीमार दृश्यों से भरपूर यह फिल्म खासतौर पर ‘मिर्जापुर’ के पुराने प्रशंसकों के लिए मनोरंजन का पूरा पैकेज बनकर सामने आती है।

मिर्जापुर की गद्दी पर फिर छिड़ी जंग

फिल्म की कहानी ‘मिर्जापुर’ के शुरुआती दौर की दुनिया में दर्शकों को वापस ले जाती है। कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) का पूर्वांचल में दबदबा कायम है। गुड्डू पंडित (अली फजल) और बबलू पंडित (जितेंद्र कुमार) उनके साथ हैं, जबकि मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु शर्मा) अपने अलग अंदाज में ताकत दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ता।

इस स्थापित साम्राज्य में हलचल तब मचती है, जब बब्बन यादव (रवि किशन) की एंट्री होती है। जैसलमेर का बाहुबली बब्बन न सिर्फ नशे के कारोबार का बड़ा खिलाड़ी है, बल्कि उसकी नजर मिर्जापुर की गद्दी पर भी है। वह रति शंकर शुक्ला और जेपी यादव के साथ मिलकर कालीन भैया के साम्राज्य को चुनौती देने निकलता है। इसके बाद सत्ता, वफादारी और वर्चस्व की लड़ाई तेज होती चली जाती है।

तीन घंटे में मिर्जापुर की दुनिया समेटने की कोशिश

वेब सीरीज की सबसे बड़ी ताकत उसके किरदार, अपराध की दुनिया और संवाद रहे हैं। फिल्म में निर्देशक गुरमीत सिंह के सामने इसी विस्तृत दुनिया को करीब तीन घंटे में समेटने की चुनौती थी। कहानी इस तरह आगे बढ़ती है कि पुराने दर्शकों को परिचित किरदारों का नॉस्टैल्जिया मिलता है, जबकि पहली बार ‘मिर्जापुर’ देखने वालों के लिए भी घटनाक्रम समझना बहुत मुश्किल नहीं होता।

फिल्म की रफ्तार अधिकांश हिस्सों में बनी रहती है। कुछ हिस्से जरूर अपेक्षाकृत धीमे महसूस होते हैं, लेकिन गैंगवार और नए किरदारों की एंट्री कहानी को लगातार आगे बढ़ाती रहती है।

गुड्डू-मुन्ना के भौकाल में भरपूर सीटीमार मोमेंट्स

‘मिर्जापुर: द मूवी’ का सबसे मजबूत पक्ष इसका मास एंटरटेनमेंट है। गुड्डू पंडित की गैंगस्टर वाली छवि हो या मुन्ना भइया का बेखौफ अंदाज, फिल्म लगातार ऐसे दृश्य पेश करती है जो सिनेमाघरों में तालियां और सीटियां बटोरने के लिहाज से तैयार किए गए हैं।

एक्शन और चेज सीक्वेंस में संगीत का भी भरपूर इस्तेमाल किया गया है। कई परिचित गानों को दृश्यों के साथ जोड़कर एक्शन का प्रभाव बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है। खासतौर पर गुड्डू और मुन्ना के बीच टकराव पुराने प्रशंसकों के लिए फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

रवि किशन की एंट्री ने बढ़ाया कहानी का वजन

फिल्म के नए किरदारों में रवि किशन सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं। बब्बन यादव के किरदार में उनका अंदाज मिर्जापुर की स्थापित दुनिया में एक नई चुनौती लेकर आता है। उनका किरदार सिर्फ कहानी आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कालीन भैया और उनके लोगों के सामने मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़ा होता है।

रवि किशन अपने संवाद, हावभाव और स्क्रीन प्रेजेंस से कई दृश्यों में प्रभाव छोड़ते हैं। पुराने किरदारों के बीच उनकी मौजूदगी फिल्म में ताजगी जोड़ती है।

पंकज त्रिपाठी का दबदबा कायम, अली-दिव्येंदु ने लौटाया पुराना रंग

कालीन भैया के किरदार में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर अपनी सहज लेकिन प्रभावशाली अदाकारी से छाप छोड़ते हैं। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी किरदार के पुराने दबदबे की याद दिलाती है। गुड्डू पंडित बने अली फजल और मुन्ना भइया के किरदार में दिव्येंदु शर्मा भी अपने परिचित तेवर में दिखाई देते हैं।

बबलू पंडित के रूप में जितेंद्र कुमार को लेकर फिल्म मिश्रित प्रभाव छोड़ती है। किरदार में उनकी मेहनत दिखाई देती है, लेकिन वे बाकी प्रमुख किरदारों के मुकाबले उतना गहरा असर नहीं छोड़ पाते।

रसिका दुग्गल, शीबा चड्ढा, सोनल चौहान, मोहित मलिक, अभिषेक बनर्जी, श्वेता त्रिपाठी और श्रिया पिलगांवकर समेत सपोर्टिंग कास्ट भी कहानी को मजबूती देती है।

फैंस के लिए मसाला एंटरटेनमेंट की पूरी खुराक

‘मिर्जापुर: द मूवी’ अपनी मूल पहचान बदलने की कोशिश नहीं करती। अपराध, सत्ता, हिंसा, गैंगवार, गालियां, बदला और वर्चस्व की लड़ाई—फिल्म उसी फॉर्मूले को बड़े पर्दे के हिसाब से ज्यादा भव्य अंदाज में पेश करती है।

अगर दर्शक ‘मिर्जापुर’ की दुनिया और उसके किरदारों के प्रशंसक रहे हैं तो गुड्डू, मुन्ना और कालीन भैया की वापसी उन्हें निराश नहीं करेगी। रवि किशन का नया किरदार इसमें अतिरिक्त आकर्षण जोड़ता है। हालांकि हिंसा और वयस्क भाषा के कारण यह पारिवारिक या बच्चों के साथ देखने वाली फिल्म नहीं कही जा सकती।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *