बरेली। स्वालेनगर स्थित अर्बन अस्पताल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ओटी और पैथोलॉजी सील किए जाने के बाद सील तोड़कर संचालन करने की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अस्पताल के दस्तावेजों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। पर्सन इंचार्ज के रूप में दर्ज डॉ. आदित्य आर्या पहले ही अस्पताल से किसी तरह का संबंध होने से लिखित रूप में इनकार कर चुके हैं। अब रिकॉर्ड में पैथोलॉजिस्ट के रूप में दर्ज डॉ. एमके गुप्ता को भी सीएमओ कार्यालय ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि डॉ. एमके गुप्ता ने अभी नोटिस का लिखित जवाब नहीं दिया है। स्वास्थ्य विभाग पूरे रिकॉर्ड की तस्दीक कर रहा है। जांच में गड़बड़ी और दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल की पुष्टि होने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में पैथोलॉजी को लेकर नई गड़बड़ी सामने आई है। जिस पैथोलॉजी को मानक पूरे न मिलने पर विभागीय टीम ने सील किया था, जांच में उसके सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत नहीं होने की बात सामने आई है। अस्पताल के रिकॉर्ड में पैथोलॉजिस्ट के तौर पर डॉ. एमके गुप्ता का नाम मिला है, जो एक निजी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं। इस पर सीएमओ कार्यालय ने उन्हें नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने और अस्पताल से अपने संबंध के बारे में जवाब देने को कहा है। फिलहाल उनका लिखित जवाब विभाग को नहीं मिला है।
डॉ. आदित्य भी दे चुके गलत दस्तावेज लगाने का लिखित बयान
इससे पहले अर्बन अस्पताल के रिकॉर्ड में डॉ. आदित्य आर्या को पर्सन इंचार्ज दर्शाया गया था। जांच में सामने आया कि उनका नाम फैय्याज केयर अस्पताल में भी इसी पद पर दर्ज है। एक चिकित्सक का दो अस्पतालों में पर्सन इंचार्ज के रूप में नाम मिलने पर सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने उनसे जवाब मांगा था। डॉ. आदित्य आर्या ने लिखित बयान में कहा कि वह फैय्याज केयर अस्पताल में ही पर्सन इंचार्ज हैं और अर्बन अस्पताल में उन्होंने इस पद पर कभी काम नहीं किया। उन्होंने अपने दस्तावेजों के गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाने की बात कही है।
पहले ओटी-पैथलैब सील, दोबारा पहुंची टीम तो टूटी मिली सील
अर्बन अस्पताल पहले से स्वास्थ्य विभाग की जांच के घेरे में है। निरीक्षण में ऑपरेशन थिएटर और पैथोलॉजी में खामियां मिलने के बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अंसारी और डॉ. अजय की टीम ने दोनों को सील किया था। इसके बाद दोबारा निरीक्षण में सील टूटी मिली। आरोप है कि सील किए जाने के बावजूद वहां चिकित्सकीय गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है और अस्पताल प्रबंधक फिरोज को नोटिस जारी किया जा चुका है।
सील से दस्तावेजों तक पहुंची जांच की आंच
जांच अब कई बिंदुओं पर केंद्रित हो गई है। एक तरफ ओटी और पैथोलॉजी की सील तोड़ने का मामला है तो दूसरी तरफ अपंजीकृत पैथोलॉजी और चिकित्सकों के दस्तावेजों के कथित गलत इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग अस्पताल प्रबंधन से जुड़े रिकॉर्ड की तस्दीक कर रहा है। प्रबंधक फिरोज के पास चिकित्सकीय डिग्री नहीं होने के पहलू को भी रिकॉर्ड और अस्पताल संचालन में उनकी भूमिका के संदर्भ में देखा जा रहा है।
आरोपों की पुष्टि हुई तो FIR, विभाग खंगाल रहा पूरा रिकॉर्ड
निजी अस्पताल पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ. लईक अंसारी के मुताबिक मामले की जांच की जा रही है। अस्पताल प्रबंधक फिरोज को नोटिस जारी किया गया है। रिकॉर्ड में पैथोलॉजिस्ट के तौर पर दर्ज डॉ. एमके गुप्ता से भी जवाब मांगा गया है, जो अभी प्राप्त नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग अस्पताल की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों, चिकित्सकों के पक्ष और अन्य रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है। जांच में सील तोड़ने, बिना पंजीकरण पैथोलॉजी संचालन या चिकित्सकों के दस्तावेजों के अनधिकृत इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर समेत नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।