नई दिल्ली। पाकिस्तान में जल संकट गहराने की आशंका के बीच रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी का अनुमान जताया गया है। पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) के अनुसार, आगामी रबी सीजन के दौरान पंजाब और सिंध प्रांत को सिंचाई के लिए निर्धारित आवश्यकता से करीब 22 प्रतिशत कम पानी मिल सकता है। इससे गेहूं सहित अन्य प्रमुख फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। खास बात यह है कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व की ओर से जल संकट के लिए भारत पर आरोप लगाए जाते रहे हैं, जबकि प्राधिकरण के आकलन में जलाशयों में कम भंडारण, पानी के अपेक्षा से कम प्रवाह और जल परियोजनाओं में देरी को प्रमुख कारण बताया गया है।
पंजाब और सिंध के किसानों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
पाकिस्तान में अक्टूबर से मार्च तक चलने वाला रबी सीजन कृषि उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान गेहूं, जौ, चना, सरसों और मसूर जैसी फसलों की खेती की जाती है। पंजाब और सिंध पाकिस्तान के प्रमुख कृषि उत्पादक प्रांत हैं। ऐसे में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से किसानों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है। पाकिस्तान की कृषि का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। अनुमान के मुताबिक, देश की 80 प्रतिशत से अधिक सिंचित कृषि इसी नदी प्रणाली से जुड़ी है। पानी की कमी के कारण गेहूं की बुआई का क्षेत्रफल घटने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे आने वाले महीनों में खाद्यान्न की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
जलाशयों में उम्मीद से काफी कम मिला पानी
सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण के आकलन के अनुसार, नदियों में पानी का प्रवाह अनुमान से करीब आठ प्रतिशत कम रहा, जबकि पिछले वर्ष की तुलना में इसमें लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जलाशयों में भी अपेक्षित मात्रा में पानी जमा नहीं हो सका। रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर को पाकिस्तान के प्रमुख जलाशयों में करीब 9.343 मिलियन एकड़ फीट पानी उपलब्ध था, जबकि 12.014 मिलियन एकड़ फीट भंडारण की उम्मीद की गई थी। इस अंतर ने रबी सीजन के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
तरबेला बांध की अधूरी परियोजनाओं ने बढ़ाई परेशानी
जल संकट के पीछे तरबेला बांध से जुड़ी निर्माणाधीन परियोजनाओं में देरी को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। बांध पर निर्माण कार्य के चलते जल भंडारण संबंधी पाबंदियां लागू रहीं, जिसके कारण तीन मिलियन एकड़ फीट से अधिक अतिरिक्त पानी का संग्रह नहीं हो सका। तरबेला बांध की टनल-4 और टनल-5 से संबंधित जलविद्युत परियोजनाओं में देरी ने भी जल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ाई हैं। इन परियोजनाओं के निर्धारित समय पर पूरा नहीं होने का असर पानी के भंडारण और वितरण पर पड़ा है। वहीं, तरबेला से अपेक्षाकृत कम पानी छोड़े जाने के कारण मंगला बांध से अधिक पानी की आपूर्ति करनी पड़ी, जिससे वहां भी पर्याप्त भंडारण नहीं हो सका।
भारत पर आरोपों के बीच सामने आई घरेलू कारणों की तस्वीर
पाकिस्तान के कई नेता देश में पानी की कमी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ गया था। हालांकि, सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने का अर्थ नदियों के पानी का प्रवाह पूरी तरह बंद होना नहीं है। सिंधु नदी प्रणाली की नदियों से पाकिस्तान की ओर पानी का प्रवाह जारी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, IRSA ने मौजूदा जल संकट के आकलन में भारत को प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया है। प्राधिकरण ने कम जल भंडारण, प्रवाह में गिरावट और परियोजनाओं में देरी जैसे कारणों की ओर ध्यान दिलाया है।
पहले 26 प्रतिशत कमी का था अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में रबी सीजन के दौरान पानी की कमी 26 प्रतिशत तक रहने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, सिंध प्रांत की आपत्तियों के बाद इसे संशोधित कर 22 प्रतिशत किया गया। अक्टूबर की शुरुआत में हुई बैठक में पंजाब और सिंध के लिए पानी की कमी का यह अनुमान स्वीकार किया गया। वहीं, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को इस कटौती से छूट दी गई है।
गेहूं उत्पादन घटा तो बढ़ सकती है महंगाई
पाकिस्तान में गेहूं प्रमुख खाद्यान्न फसल है। पिछले वर्ष भी गेहूं का उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से कम रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, देश को 20 लाख टन से अधिक गेहूं की कमी का सामना करना पड़ा था और लगभग 10 लाख टन गेहूं के आयात का ऑर्डर दिया गया था। ऐसे में इस बार सिंचाई के लिए पानी की कमी होने से गेहूं उत्पादन पर और दबाव बढ़ सकता है। चना, मसूर, जौ और तंबाकू जैसी दूसरी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। यदि उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है तो पाकिस्तान को खाद्यान्न आयात बढ़ाना पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने के साथ किसानों की आमदनी पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
कमजोर जल प्रबंधन और बदलता मौसम भी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में जल संकट की समस्या केवल मौजूदा सीजन तक सीमित नहीं है। जलाशयों की सीमित भंडारण क्षमता, सिंचाई नहरों का कमजोर रखरखाव, जल परियोजनाओं में देरी और मौसम में बदलाव जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। बारिश और बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी की मात्रा में उतार-चढ़ाव भी जल उपलब्धता को प्रभावित करता है। फिलहाल रबी सीजन में 22 प्रतिशत पानी की संभावित कमी ने पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। समय रहते सिंचाई और जल वितरण की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो इसका असर कृषि उत्पादन के साथ देश की खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।