मेरठ। चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत का फैसला सुनते ही दोनों फूट-फूटकर रो पड़े। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों गहरे सदमे में हैं। जेल प्रशासन ने उनकी काउंसलिंग कराने के साथ ही निगरानी बढ़ा दी है। वहीं, मुस्कान ने जेलर से मुलाकात के दौरान उच्च न्यायालय में अपील करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी।
मेरठ जेल के जेलर डॉ. वीरेश राज ने बताया कि बुधवार को मुस्कान और साहिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए थे। इससे पहले 30 सितंबर को अदालत ने दोनों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद उन्हें आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा सुनाई जानी थी। जेलर के मुताबिक, दोनों को उम्मीद थी कि अदालत उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाएगी। हालांकि, शाम को जैसे ही अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया, दोनों के चेहरे उतर गए। सजा सुनते ही मुस्कान और साहिल रोने लगे। फैसले के बाद दोनों काफी परेशान नजर आए।
जेल प्रशासन ने कराई काउंसलिंग, बढ़ाई निगरानी
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जेल प्रशासन ने दोनों की मानसिक स्थिति को देखते हुए काउंसलिंग कराई। चिकित्सकों को भी उनकी स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जेलर ने बताया कि दोनों फिलहाल सदमे में हैं। ऐसे में बंदी रक्षकों के साथ सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। इसके अलावा दोनों को निर्धारित महिला और पुरुष बैरकों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जेल प्रशासन के अनुसार, मुस्कान को नियमानुसार बच्चों के साथ रहने वाली महिला बंदियों के लिए निर्धारित बैरक में रखा जाएगा।
जेलर से मुस्कान ने पूछा, हाईकोर्ट में कैसे होगी अपील?
सजा सुनाए जाने के बाद अपनी बैरक में लौटने से पहले मुस्कान ने जेलर डॉ. वीरेश राज से मुलाकात की। इस दौरान उसने पूछा कि अदालत के फैसले के खिलाफ अपील कैसे की जा सकती है। जेलर ने बताया कि मुस्कान को कानूनी प्रक्रिया के बारे में प्रारंभिक जानकारी दी गई है। उसे समझाया गया कि फैसले की आधिकारिक प्रति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोनों दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है।
निजी वकील नहीं किया तो मिलेगी सरकारी कानूनी सहायता
जेलर डॉ. वीरेश राज के अनुसार, मुस्कान और साहिल चाहें तो अपने निजी अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। यदि वे निजी वकील की व्यवस्था नहीं करते हैं, तो जेल प्रशासन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा। फिलहाल दोनों ने अपील को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। जेल प्रशासन को उन्होंने बताया है कि एक-दो दिन में विचार करने के बाद अपना फैसला बताएंगे। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।