बरेली। आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े की जांच ने पूरी कहानी ही पलट दी। रिटायर्ड शिक्षक बाबू अंसारी जिस मामले में अपने दामाद पर आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज का क्लेम हड़पने का आरोप लेकर डीएम के पास पहुंचे थे, जांच के बाद उसी मामले में वह खुद परिवार समेत घिर गए। संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर रिटायर्ड शिक्षक, उनके सिपाही बेटे, होमगार्ड बहू समेत पांच लोगों के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे आयुष्मान योजना से अनुचित लाभ लिया गया।
गुलिस्तां कॉलोनी, जगतपुर निवासी रिटायर्ड शिक्षक बाबू अंसारी ने 20 अगस्त को डीएम से शिकायत की थी। उनका कहना था कि वर्ष 2024 में उन्होंने आफताब आई केयर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। इलाज के करीब 15 हजार रुपये उन्होंने अपनी जेब से दिए। पत्नी के इलाज का खर्च भी खुद उठाया, लेकिन बाद में पता चला कि उनके और पत्नी के इलाज के नाम पर आयुष्मान योजना से भी क्लेम लिया गया है।
जिस पर था भरोसा, उसी दामाद पर उठाई उंगली
बाबू अंसारी ने इस पूरे खेल का आरोप अपने दामाद जावेद अख्तर अंसारी पर लगाया था। शिकायत में कहा था कि दामाद ने ही इलाज की व्यवस्था कराई थी। रिश्तेदारी के कारण उस पर भरोसा किया और इलाज से जुड़े बिल व दूसरे दस्तावेज नहीं मांगे। बाद में आयुष्मान से क्लेम की जानकारी मिलने पर उन्हें शक हुआ। उन्होंने डीएम से आयुष्मान कार्ड से लेकर अस्पताल के क्लेम तक का पूरा रिकॉर्ड निकलवाने की मांग की थी। मामला डीएम तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई। इससे पहले 18 अगस्त को दूसरी तरफ से भी शिकायत की गई थी। दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद 21 अगस्त को संयुक्त जांच टीम बनाई गई। टीम ने दस्तावेजों और पूरे मामले की पड़ताल की। जांच रिपोर्ट सामने आई तो शिकायत में लगाए गए आरोपों से अलग तस्वीर सामने आई और बाबू अंसारी का परिवार ही जांच के घेरे में आ गया।
रिटायर्ड टीचर से सिपाही बेटे तक पांच नामजद
जिला शिकायत निवारण अधिकारी अमीर बेग की ओर से कोतवाली पुलिस को भेजे पत्र के आधार पर बाबू अंसारी, उनकी पत्नी नसरीन बेगम, बेटे मोहम्मद जावेद अंसारी और मोहम्मद जहाजेब अंसारी तथा बहू नेहा रानी को नामजद किया गया है। मोहम्मद जावेद अंसारी पुलिस में सिपाही हैं और डायल-112 से जुड़े बताए गए हैं, जबकि उनकी पत्नी नेहा रानी होमगार्ड हैं। जांच के बाद आरोप लगाया गया कि आयुष्मान भारत योजना में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अनुचित लाभ लिया गया। फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाने, उनका इस्तेमाल कराने और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग में दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच होगी। यानी पांच नामजद आरोपियों तक ही मामला सीमित नहीं है। पुलिस की विवेचना में अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
पहले दामाद पर धमकी और वसूली के भी लगाए थे आरोप
डीएम को दी शिकायत में बाबू अंसारी ने दामाद पर परिवार को मुकदमों में फंसाने और समझौते के लिए दबाव बनाने के आरोप भी लगाए थे। उनका दावा था कि पहले एक शिकायत में 1.30 लाख रुपये लेकर समझौता किया गया और शपथपत्र दिया गया था, लेकिन इसके बाद फिर शिकायतें शुरू हो गईं। बाबू ने इन्हीं आरोपों के साथ पूरे आयुष्मान रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की थी। अब पुलिस विवेचना में सबसे अहम सवाल यही होगा कि आयुष्मान कार्ड कब और कैसे बने, इलाज में उनका इस्तेमाल किस तरह हुआ, अस्पताल की ओर से कितना क्लेम किया गया और उसका भुगतान कहां पहुंचा। इसके साथ ही कार्ड बनवाने से लेकर क्लेम तक की पूरी कड़ी में कौन-कौन शामिल था, इसकी भी जांच होगी। मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। फिलहाल पांच लोगों को नामजद किया गया है।