bareillyसंस्था प्रमुख के अनुसार कंबल थेरेपी का नियमित कैंप प्रत्येक रविवार सुबह 11 से

बरेली। आध्यात्मिक ज्ञान, योग और ऊर्जा उपचार से जुड़े कार्यक्रम संचालित करने वाला बीइंग स्पिरिचुअल फाउंडेशन (बीएसएफ) इन दिनों कंबल थेरेपी और रेकी सत्रों को लेकर चर्चा में है। संस्था का दावा है कि कंबल थेरेपी के निशुल्क सत्र आयोजित किए जाते हैं, जबकि रेकी सीखने के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है। हालांकि उपचार से 20 से 40 फीसदी राहत और लगातार सत्रों के बाद 70 से 100 फीसदी लाभ के दावों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि सामने नहीं आई है।

हर रविवार निशुल्क सत्र का दावा

संस्था प्रमुख के अनुसार कंबल थेरेपी का नियमित कैंप प्रत्येक रविवार सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक आयोजित किया जाता है। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति या दूर-दराज से आने वाले लोगों की जरूरत के अनुसार अन्य दिनों में भी सत्र आयोजित किए जा सकते हैं। रेकी प्रशिक्षण को अलग प्रक्रिया बताते हुए इसके लिए निर्धारित शुल्क लिए जाने की जानकारी दी गई है।

रेकी सत्र में स्पर्श के जरिए प्रक्रिया

संस्था में आयोजित एक रेकी सत्र के वीडियो में हीलर को एक व्यक्ति के पीछे खड़े होकर उसके कंधे, गर्दन और रीढ़ के ऊपरी हिस्से के आसपास हाथों के जरिए प्रक्रिया करते देखा गया। कुछ देर बाद हाथ झटकने और चुटकी बजाने के साथ सत्र समाप्त किया गया। आसपास मौजूद अन्य लोग भी प्रक्रिया देखते नजर आए।

20-40 फीसदी राहत का दावा

संस्था प्रमुख का कहना है कि कंबल थेरेपी के एक ही सत्र में पूरी समस्या का समाधान होना सामान्य नहीं है। उनके अनुसार व्यक्ति की स्थिति और समस्या के आधार पर पहले सत्र के बाद 20 से 40 फीसदी तक राहत मिल सकती है। उनका कहना है कि बेहतर परिणाम के लिए लगातार सत्र आवश्यक हैं।

चार-पांच सत्रों में 70-100 फीसदी लाभ का दावा

संस्था की ओर से लगातार चार से पांच सत्रों के बाद पांचवें सत्र तक 70 से 100 फीसदी लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि इन प्रतिशतों के समर्थन में कोई स्वतंत्र चिकित्सकीय अध्ययन, परीक्षण या वैज्ञानिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में इन्हें प्रमाणित चिकित्सा परिणाम के बजाय संस्था का दावा ही माना जाना चाहिए।

योग और जीवनशैली पर भी जोर

संस्था प्रमुख उपचार के साथ योग, योगासन और स्वस्थ जीवनशैली को भी महत्वपूर्ण बताते हैं। उनका कहना है कि व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए किसी एक थेरेपी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। नियमित योग, शारीरिक अभ्यास और जीवनशैली में सुधार को दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।

‘डॉक्टर’ लिखने पर मानद उपाधि का हवाला

अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ लिखने के संबंध में संस्था प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2025 में उन्हें किर्गिस्तान की Osh State University से मानद उपाधि मिली थी। उनके अनुसार वर्ष 2021 से किए जा रहे कार्यों के आधार पर यह सम्मान दिया गया। मानद उपाधि और चिकित्सा क्षेत्र की पेशेवर डिग्री अलग-अलग श्रेणियां हैं, इसलिए इन्हें समान नहीं माना जा सकता।

रेकी को प्राण ऊर्जा से जोड़ते हैं

संस्था प्रमुख रेकी को ब्रह्मांडीय अथवा प्राण ऊर्जा से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि ध्यान और नीयत के माध्यम से इस ऊर्जा को केंद्रित कर व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। इसे समझाने के लिए उन्होंने मां के स्पर्श और संतों के आशीर्वाद का उदाहरण दिया।

2021 में हुई थी संस्था की स्थापना

बीइंग स्पिरिचुअल फाउंडेशन के अनुसार इसकी स्थापना 2021 में बरेली में आध्यात्मिक ज्ञान, योग, ध्यान और धर्मार्थ गतिविधियों के उद्देश्य से हुई। संस्था योग, माइंड प्रोग्रामिंग, एनर्जी हीलिंग, ध्यान और परामर्श समेत कई कार्यक्रम संचालित करती है। संस्था के मुताबिक अब तक 500 से अधिक ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यक्रम हो चुके हैं, जिनमें 10 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

गंभीर बीमारी में चिकित्सकीय सलाह जरूरी

कंबल थेरेपी और रेकी के प्रभाव से जुड़े दावों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि इस जानकारी में सामने नहीं आई है। खासकर राहत के प्रतिशत वाले दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार परिणाम नहीं माना जा सकता। गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लिए किसी भी वैकल्पिक उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।

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