बरेली। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर सियासी जमीन तैयार कर रहे राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (राम) में बगावत के सुर उठने लगे हैं। रविवार को बरेली में प्रेसवार्ता कर संगठन से जुड़े कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष व निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रेसवार्ता में प्रदेश कार्यकारिणी के लिए दो-दो लाख रुपये की कथित डिमांड से लेकर विदेशी फंडिंग तक के आरोप लगाए गए। पदाधिकारियों ने संगठन के नाम पर हो रहे धन संग्रह पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर अलंकार अग्निहोत्री का पक्ष सामने नहीं आया है।
प्रेसवार्ता में पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि उनका फौजी पृष्ठभूमि से नाता है और वह अलंकार अग्निहोत्री के साथ उस समय से जुड़े थे, जब उनके इस्तीफे का मामला सामने आया था। शर्मा का दावा है कि अग्निहोत्री के साथ सात-आठ लोगों की एक कोर कमेटी सक्रिय थी और उन्होंने संगठन खड़ा करने में पूरा सहयोग किया। अजय शर्मा ने कहा कि उन्होंने अग्निहोत्री का तन, मन और धन से साथ दिया तथा ब्रज क्षेत्र में घूमकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया। इस दौरान उन्हें संगठन में कई कमियां दिखाई दीं, जिन्हें उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने भी रखा। उनका आरोप है कि शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय नजरअंदाज किया गया।
आगरा के पदाधिकारी को लेकर लगाया गंभीर आरोप
अजय शर्मा ने आगरा से जुड़े एक प्रकरण का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां संगठन से जुड़े एक व्यक्ति की महिलाओं को फोन करने संबंधी शिकायत उनके पास आई थी। उन्होंने यह शिकायत अलंकार अग्निहोत्री तक पहुंचाई, लेकिन कथित तौर पर कार्रवाई नहीं हुई। शर्मा ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर अग्निहोत्री ने महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शर्मा के मुताबिक संबंधित व्यक्ति को बाद में प्रदेश सचिव तक बना दिया गया, जिसका आगरा की जिला इकाई ने विरोध किया। उन्होंने इस घटनाक्रम को संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला बताया। ये सभी आरोप प्रेसवार्ता में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदेश कार्यकारिणी में दो-दो लाख रुपये की मांग का आरोप
प्रेसवार्ता में सबसे गंभीर सवाल संगठन के नाम पर कथित धन संग्रह को लेकर उठाए गए। अजय शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश कार्यकारिणी में पदाधिकारियों से दो-दो लाख रुपये तक की मांग की जा रही है। जिलाध्यक्षों से भी पर्चियां छपवाकर धन जुटाने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संगठन के नाम पर पैसा एकत्र किया जा रहा है तो उसका पूरा हिसाब और उपयोग सार्वजनिक होना चाहिए। शर्मा ने कहा कि कार्यकर्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि एकत्र किया जा रहा धन आखिर कहां और किस मद में खर्च हो रहा है।
सामूहिक इस्तीफे में लिखा- धन संग्रह की प्रक्रिया से सहमत नहीं
पदाधिकारियों की ओर से प्रदेश अध्यक्ष को संबोधित सामूहिक इस्तीफे में भी धन संग्रह का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। इस्तीफे में कहा गया है कि संगठन की कुछ गतिविधियों और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर असहमति है। विशेष रूप से राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के नाम पर लोगों से धनराशि मांगे जाने और धन संग्रह की प्रक्रिया से पदाधिकारी स्वयं को सहमत नहीं पाते हैं। इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों ने दावा किया है कि राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा राजनीतिक पार्टी नहीं बल्कि एक ट्रस्ट है। ऐसे में ट्रस्ट के नाम पर होने वाली गतिविधियों और धन संग्रह में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि वे ऐसी किसी गतिविधि का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जिससे भविष्य में उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या पद से जुड़ी जिम्मेदारी प्रभावित हो। इसी आधार पर उन्होंने अपने पदों से तत्काल प्रभाव से मुक्त करने की मांग की है।
नाम और पद इस्तेमाल न करने की भी मांग
सामूहिक इस्तीफे में पदाधिकारियों ने एक और अहम मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद संगठन की किसी गतिविधि, प्रचार-प्रसार या धन संग्रह में उनके नाम, पद अथवा व्यक्तिगत पहचान का इस्तेमाल न किया जाए। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा को राम के रूप में आगे बढ़ाया है। संगठन की ओर से आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का दावा किया जा चुका है। अग्निहोत्री भी संगठन विस्तार के लिए विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। ऐसे समय में बरेली से संगठन के पुराने सहयोगियों और पदाधिकारियों का खुलकर विरोध में आना तथा सामूहिक इस्तीफा देना राम के लिए बड़ा अंदरूनी झटका माना जा रहा है। प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों पर अलंकार अग्निहोत्री अथवा संगठन की ओर से जवाब आने के बाद ही उनका पक्ष स्पष्ट हो सकेगा।