बरेली। लंबित मानदेय, प्रोत्साहन राशि और बीमा समेत विभिन्न मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने 23 अक्टूबर को राजधानी में महापड़ाव का ऐलान किया है। यूनियन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी व सीएचसी स्तर पर नोटिस भेजकर शासन से 7 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते को लागू करने की मांग की है।

समझौते के बावजूद नहीं हुई अंतिम बैठक

यूनियन का आरोप है कि 7 फरवरी की वार्ता में आशा और संगिनी के आधार भुगतान, मातृत्व अवकाश, जीवन व स्वास्थ्य बीमा तथा लंबित प्रोत्साहन राशि समेत 13 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी थी। इसके बाद अपर प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट आने के बावजूद समझौते को लागू करने के लिए अंतिम बैठक अब तक नहीं बुलाई गई।

2018 से कई प्रोत्साहन भुगतान अटके

यूनियन ने कहा कि आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी, पोलियो, फाइलेरिया, कुष्ठ, टीबी, स्क्रीनिंग, दस्तक व संचारी अभियान समेत कई कार्यों की प्रोत्साहन राशि वर्षों से लंबित है। कोविड-19 के दौरान केंद्र सरकार की ओर से घोषित एक हजार रुपये मासिक प्रोत्साहन का भुगतान भी लंबित बताया गया है। जेएसवाई और नसबंदी के भुगतान में भी देरी का आरोप लगाया गया।

मानदेय 10 हजार और प्रोत्साहन राशि की मांग

यूनियन ने आशा कार्यकर्ताओं का आधार भुगतान 10 हजार रुपये करने तथा आशा संगिनियों के भुगतान में भी वृद्धि की मांग की है। राज्यांश 1500 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये करने, आयुष्मान व आभा आईडी के योगदान का पूरा भुगतान और विभिन्न अभियानों की प्रोत्साहन राशि 500 रुपये प्रतिदिन तय करने की मांग रखी गई है।

बीमा, मातृत्व अवकाश और मुकदमे वापसी की मांग

मांगपत्र में कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अतिरिक्त पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा दो से बढ़ाकर 10 लाख रुपये, चार माह का मातृत्व अवकाश और जीएसकैस समितियों के गठन की मांग की गई है। आशा संगिनी को यात्रा भत्ता अथवा दोपहिया वाहन देने के साथ सोनभद्र और पीलीभीत में आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी उठाई गई है। यूनियन ने 45वें-46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू करने के लिए वैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *