बरेली। यूपी पुलिस के तेजतर्रार और सख्त छवि के पीपीएस अधिकारी राजकुमार अग्रवाल ने अपने लंबे पुलिस सेवा काल में ईमानदार, प्रभावी और परिणाम आधारित पुलिसिंग की अलग पहचान बनाई है। पीपीएस अधिकारी के रूप में करियर शुरू करने वाले राजकुमार अग्रवाल अपनी कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और कानून-व्यवस्था पर मजबूत पकड़ के दम पर आईपीएस तक पहुंचे। प्रदेश के जिन-जिन जनपदों में उन्होंने जिम्मेदारी संभाली, वहां अपराध नियंत्रण, बेहतर कानून-व्यवस्था और लोगों में उनका विश्वास उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी।
बरेली से उनका विशेष जुड़ाव रहा है। यहां उन्होंने 2012 में सीओ सिटी प्रथम और सीओ सिटी द्वितीय के रूप में कार्य किया। उस दौरान बरेली शहर सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस रहा था। एक साल में दो बार शहर सांप्रदायिक तनाव और कम्युनल राइट्स जैसी संवेदनशील परिस्थितियों से गुजरा। तत्कालीन डीएम और एसएसपी ने बानखाना, कोहाड़ापीर, गुद्दड़बाग, जगतपुर जैसे इलाकों में हालात सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण थे, वहां राजकुमार अग्रवाल को मोर्चे पर लगाया। उन्होंने अपनी सूझबूझ, शांत स्वभाव, संवाद क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की शैली से हालात पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया। दोनों समुदायों के बीच संवाद कायम कर शांति बहाल कराने में उनकी भूमिका को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी सराहा।
एसपी देहात बनकर ड्रग नेटवर्क पर किया सबसे बड़ा प्रहार
वर्ष 2021 से 2023 तक बरेली में एसपी देहात रहते हुए राजकुमार अग्रवाल ने ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय नशा तस्करों और संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाया। फतेहगंज पूर्वी, फतेहगंज पश्चिमी, फरीदपुर, मीरगंज समेत कई थाना क्षेत्रों में एनडीपीएस एक्ट के तहत लगातार कार्रवाई कर ड्रग नेटवर्क की कमर तोड़ दी। नशा कारोबार से अर्जित अवैध संपत्तियों को भी चिन्हित किया गया और माफियाओं की आर्थिक ताकत खत्म करने की रणनीति पर काम किया। राजकुमार अग्रवाल के नेतृत्व में मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े माफियाओं की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को जब्त और कुर्क कराया गया। अपराध से अर्जित संपत्तियों पर हुई इस बड़ी कार्रवाई ने पूरे जिले में माफियाओं में खलबली मच गई।
सख्त पुलिसिंग के साथ जनता से संवाद भी रहा मजबूत पक्ष
राजकुमार अग्रवाल की कार्यशैली केवल अपराधियों के खिलाफ सख्ती तक सीमित नहीं रही। वे हमेशा जनता से सीधे संवाद स्थापित करने और संवेदनशील मामलों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए भी जाने जाते हैं। कानून-व्यवस्था के हर चुनौतीपूर्ण मौके पर उन्होंने टीम लीडर के रूप में प्रभावी निर्णय लेकर प्रशासन का विश्वास जीता। यही वजह रही कि उन्हें लगातार महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपी जाती रहीं।
हमीरपुर से शुरू हुआ सफर, प्रदेश के कई जिलों में छोड़ी छाप
वर्ष 1999 बैच के पीपीपीएस अधिकारी राजकुमार अग्रवाल मूल रूप से हमीरपुर जिले के राठ कस्बे के निवासी हैं। प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल और लखनऊ में प्राप्त करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन में वे पीसीबी हॉस्टल से जुड़े रहे। वर्ष 2003 में झांसी में पहली तैनाती के बाद उन्होंने जालौन, बरेली और लखनऊ में सीओ, प्रतापगढ़ में अपर पुलिस अधीक्षक, कानपुर नगर में वर्ष 2018 से 2021 तक एसपी सिटी, वर्ष 2021 से 2023 तक बरेली में एसपी देहात और बाद में हापुड़ समेत कई महत्वपूर्ण जनपदों में जिम्मेदारियां निभाईं।