नई दिल्ली। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का मार्च 2026 का महत्वपूर्ण फैसला एक बार फिर चर्चा में है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी OBC अभ्यर्थी को केवल उसके माता-पिता की वेतन आय के आधार पर ‘क्रीमी लेयर’ में नहीं रखा जा सकता। माता-पिता के पद, सेवा की श्रेणी और सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा। अब केंद्र सरकार ने इस फैसले के क्रियान्वयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। मामले पर 17 सितंबर 2026 को सुनवाई प्रस्तावित है।
मार्च के फैसले ने बदली बहस की दिशा
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को Union of India बनाम Rohith Nathan मामले में केंद्र की अपीलें खारिज करते हुए कहा था कि OBC क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता की आय देखकर नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार माता-पिता जिस पद और श्रेणी की नौकरी में हैं, उसका दर्जा भी महत्वपूर्ण है। यह विवाद खास तौर पर ऐसे अभ्यर्थियों से जुड़ा था, जिनके माता-पिता PSU, बैंक अथवा अन्य संस्थानों में कार्यरत थे और उनकी वेतन आय के आधार पर अभ्यर्थियों को OBC-NCL लाभ से बाहर कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और समान स्तर के PSU/private-sector पदों के बीच भेदभाव के सवाल को भी महत्वपूर्ण माना।
केंद्र ने अब क्यों मांगा स्पष्टीकरण?
मार्च के फैसले के बाद केंद्र सरकार के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि अदालत के निर्देशों को भर्ती प्रक्रियाओं में किस तरह लागू किया जाए। इसी को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र ने विशेष रूप से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया है कि फैसले का अनुप्रयोग किस प्रकार किया जाए।
UPSC अभ्यर्थियों पर भी पड़ सकता है असर
इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिविल सेवा परीक्षा है। मूल मामले में ऐसे OBC अभ्यर्थी शामिल रहे हैं, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की, लेकिन माता-पिता की आय के आधार पर उन्हें क्रीमी लेयर मानते हुए आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसे मामलों की दोबारा समीक्षा का रास्ता खुला है।
क्या OBC आरक्षण बढ़ने वाला है?
नहीं। अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना गलत होगा कि सुप्रीम कोर्ट OBC आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने या घटाने जा रहा है। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से क्रीमी लेयर की पहचान और OBC-NCL पात्रता तय करने के तरीके से संबंधित है।
17 सितंबर की सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण?
17 सितंबर की सुनवाई में अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि मार्च के फैसले को भर्ती प्रक्रियाओं में किस तरह लागू किया जाए और किन परिस्थितियों में माता-पिता की नौकरी तथा आय को OBC क्रीमी लेयर निर्धारित करने में महत्व दिया जाएगा। इससे भविष्य की भर्तियों के साथ-साथ पुराने मामलों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।
पत्रकारिता का बड़ा सवाल
अगर केवल आय ही अंतिम कसौटी नहीं है, तो OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए पद, सेवा-श्रेणी और सामाजिक स्थिति का मूल्यांकन किस निश्चित फार्मूले से होगा? यही सवाल अब केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे महत्वपूर्ण है। 17 सितंबर की सुनवाई के बाद इस दिशा में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।