बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम सुर, संगीत और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। त्वमेव माता गायन संध्या में कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज से ऐसा समां बांधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। जय जय जय दुर्गे माता भवानी और भवानी दायनी जैसे भजनों की गूंज से पूरा सभागार भक्तिमय हो उठा। वहीं, गजलों और फिल्मी गीतों की मधुर प्रस्तुतियों ने संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। गायन गुरुओं और विद्यार्थियों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ गायन के विद्यार्थियों ने स्केल बी पर आधारित बंदिश दुर्गे महारानी से किया। इसके बाद गायन गुरु सात्विक मिश्रा ने जय जय जय दुर्गे माता भवानी की शानदार प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भक्ति के रंग में रंग दिया। विद्यार्थियों ने स्केल सी पर माता काली भजन प्रस्तुत कर माहौल को और भक्तिमय बना दिया। सात्विक मिश्रा ने भवानी दायनी भजन को अपनी सुरीली आवाज में पिरोया तो श्रोता झूम उठे।
गजलों की महफिल सजी, मेहदी हसन की यादें हुईं ताजा
भक्ति गीतों के साथ गजलों की प्रस्तुतियों ने भी संगीत संध्या में चार चांद लगा दिए। अंशुमा अग्रवाल ने प्रसिद्ध गजल कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। वहीं, छात्रा श्रेया ने अबके हम बिछड़े गजल को अपनी आवाज देकर मशहूर गजल गायक मेहदी हसन की याद ताजा कर दी। गायन गुरु प्रियंका ग्वाल ने भीनी भीनी भूराई की मधुर प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया। गायन संध्या में रिद्धिमा की गायन गुरु प्रियंका ग्वाल और सात्विक मिश्रा के साथ विद्यार्थियों अंशुमा अग्रवाल, गीतू अरोरा, मानसी टंडन, नीलम, अशोक आनंद, शिप्रा पाठक, अक्षिता और वंश तिवारी ने अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भजन, गजल और फिल्मी गीतों की प्रस्तुतियों में सुर और ताल का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। कलाकारों की हर प्रस्तुति को श्रोताओं ने तालियां बजाकर सराहा।
वायलिन, तबले और सारंगी की जुगलबंदी ने बढ़ाया संगीत का जादू
गायन संध्या में वाद्ययंत्रों की संगत भी आकर्षण का केंद्र रही। वायलिन पर सूर्यकांत चौधरी, परकशन पर सुरेंदर सिंह, तबले पर दीपकांत जौहरी और अमरनाथ, गिटार पर विशेष सिंह, ड्रम्स पर अनुग्रह सिंह, पखावज पर ऋषभ आशीष पाठक, हारमोनियम पर पवन भारद्वाज, कीबोर्ड पर डेरिक अमन जेम्स, सारंगी पर ध्रुव त्रिपाठी और सितार पर सीमा ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और गायन के संगम ने संगीत संध्या को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति, आदित्य मूर्ति, आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, देविशा मूर्ति, उषा गुप्ता, सुभाष मेहरा, डॉ. एमएस बुटोला, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. शैलेश सक्सेना और डॉ. रीता शर्मा सहित शहर के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।