बरेली। बरेली में प्राइवेट बसों का खेल भी गजब है। बसें दिल्ली, जयपुर और दूसरे राज्यों तक यात्रियों को लेकर दौड़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा के इंतजामों की हालत ऐसी कि जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी गेट तक नहीं खुल रहा। परिवहन विभाग की चेकिंग में एक स्लीपर बस का दरवाजा पूरी तरह जाम मिला। चालक ने खोलने की कोशिश की, लेकिन गेट नहीं खुला। इसके बाद आरटीओ प्रवर्तन प्रणव झा ने बस को सीज कर थाने में खड़ा करा दिया और उसकी फिटनेस रद्द करने के निर्देश दिए।
सड़क पर दौड़ती रही बस, गेट खोलने में छूटे पसीने
ऑपरेशन कवच-3.0 के तहत 16 और 17 अक्टूबर को बसों की जांच की गई। इस दौरान स्लीपर बस का इमरजेंसी गेट खुलवाया गया तो उसकी खराब हालत सामने आ गई। चालक ने काफी कोशिश की, लेकिन दरवाजा टस से मस नहीं हुआ। बस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह बड़ी लापरवाही है। हादसे या आग लगने पर मुख्य दरवाजा बंद हो जाए तो यात्री बाहर कैसे निकलेंगे, इसका अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है।
दो दिन में 18 बसें सीज, 52 के चालान
परिवहन विभाग के अभियान में बरेली संभाग में दो दिन के भीतर 18 बसों को सीज किया गया और 52 वाहनों के चालान काटे गए। जांच में इमरजेंसी गेट, अग्निशामक यंत्र, बसों की बॉडी, तय क्षमता से ज्यादा सीटें और स्लीपर बनाने, छत पर सामान लादने और परमिट की शर्तों की अनदेखी जैसी कमियां पकड़ी गईं।
फिटनेस के नाम पर कैसे मिलती रही छूट
बसों में सुरक्षा के इंतजाम दुरुस्त रखना संचालकों की जिम्मेदारी है, लेकिन सड़क पर दौड़ रही बस का इमरजेंसी गेट जाम मिलना जांच व्यवस्था की भी पोल खोलता है। दिल्ली और जयपुर जैसे लंबे रूटों पर चलने वाली बसों में ऐसी कमी यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकती है। आरटीओ की कार्रवाई के बाद अब बस संचालकों पर सख्ती जरूरी है, ताकि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति न हो और यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाली बसें सड़क से हटें।