बरेली/देहरादून। उत्तराखंड की सत्ता के गलियारों से लेकर उत्तर प्रदेश के बरेली तक चर्चाओं में रहने वाले पप्पू गिरधारी उर्फ गिरधारी लाल साहू की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ 35 साल पुराने चर्चित जैन दंपती हत्याकांड की अदालती कार्यवाही, दूसरी तरफ पत्नी और उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर। इन दोनों मामलों के बीच अब उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बरेली में भी साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुराने मुकदमों, कंपनियों के दस्तावेजों और वायरल ऑडियो की जांच से इस विवाद का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
राजनीतिक पहचान को विस्तार देने की कोशिशों के बीच गिरधारी लाल साहू एक बार फिर गंभीर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गए हैं। बरेली में उनके खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। उधर, पति-पत्नी के बीच करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। बरेली में रेखा आर्या और गिरधारी से जुड़े बताए जा रहे विशाल आलीशान आवास की भी चर्चा हो रही है।
पति-पत्नी के बीच ‘वो’ की एंट्री, कल्पना मिश्रा से जुड़ी कड़ी ने विवाद को दिया नया मोड़
रेखा आर्या और पप्पू गिरधारी के बीच गहराते विवाद में एक महिला का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। यह नाम है कल्पना मिश्रा, जिन्हें गिरधारी की पूर्व मैनेजर बताया जा रहा है। कल्पना और गिरधारी के बीच कथित नजदीकियों को पति-पत्नी के रिश्तों में बढ़ती तल्खी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इन निजी संबंधों और विवाद की शुरुआत को लेकर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एक महिला और गिरधारी के बीच बातचीत का कथित ऑडियो भी प्रसारित हुआ है। इस रिकॉर्डिंग में लाखों रुपये के लेनदेन और एक मामले में अंतिम रिपोर्ट लगवाने से संबंधित बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। गिरधारी ने ऑडियो को एआई से तैयार बताया है, जबकि रेखा आर्या ने इसकी सत्यता का दावा किया है। कल्पना मिश्रा का नाम इस पूरे घटनाक्रम में इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि प्रकाशित रिपोर्ट में उनके जेल जाने और बाद में रिहा होने का उल्लेख है। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज मामले, गिरफ्तारी के कारण और वर्तमान कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। एसआईटी की जांच में यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित रिकॉर्डिंग, महिला और पति-पत्नी के विवाद के बीच वास्तव में क्या संबंध है।
बरेली पहुंची उत्तराखंड एसआईटी, पुराने मुकदमों की फाइलें भी खुलेंगी
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की शिकायत पर दर्ज मुकदमे की जांच कर रही देहरादून पुलिस की एसआईटी ने अब बरेली से साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। शनिवार को पुलिस टीम बरेली भेजे जाने की जानकारी सामने आई। जांच का उद्देश्य गिरधारी लाल साहू के पुराने मुकदमों, कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य आरोपों की पड़ताल करना है। देहरादून के एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के अनुसार, शिकायत से जुड़े घटनाक्रम का संबंध बरेली से है। इसलिए जांच टीम वहां साक्ष्य जुटा रही है। पुराने मुकदमों की जानकारी भी एकत्र की जा रही है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
35 साल पुराना जैन दंपती हत्याकांड फिर चर्चा में, चार नवंबर को सुनवाई
पप्पू गिरधारी का नाम बरेली के चर्चित जैन दंपती हत्याकांड के आरोपियों में शामिल है। करीब 35 साल पहले सिविल लाइंस स्थित आवास पर नरेश जैन और उनकी पत्नी पुष्पा जैन की हत्या कर दी गई थी। दंपती की बेटी की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में गिरधारी समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में सुनवाई लंबे समय से चल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नामजद आरोपियों में से छह ही जीवित बचे हैं। वर्ष 2013 में मुकदमे की पत्रावली गुम होने के कारण अदालती प्रक्रिया भी प्रभावित हुई थी। बाद में जिला जज के आदेश पर पत्रावली दोबारा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को एडीजे-10 की अदालत में निर्धारित बताई गई है। गिरधारी और अन्य आरोपियों की ओर से उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में भी कानूनी राहत के प्रयास किए जाने की जानकारी सामने आई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि गिरधारी इस हत्याकांड में आरोपी हैं, दोषसिद्ध नहीं।
39 मुकदमों का रिकॉर्ड, पुराने आपराधिक इतिहास की भी पड़ताल
बरेली पुलिस के रिकॉर्ड में पप्पू गिरधारी के खिलाफ कुल 39 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मामलों में अंतिम रिपोर्ट लग चुकी है, जबकि कई मामलों का निस्तारण अदालतों में हो चुका है। बारादरी थाने में उनकी हिस्ट्रीशीट होने की बात भी प्रकाशित रिपोर्टों में सामने आई है। अब उत्तराखंड में दर्ज नए मुकदमे के बाद उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की पड़ताल भी महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, पुराने मुकदमों में दोबारा जांच या सुनवाई तेज होने के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अदालत के आदेश आवश्यक होंगे।
करोड़ों की संपत्ति पर सवाल, बरेली के आलीशान महल की चर्चा
इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित पहलू करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप भी है। गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो जारी कर पत्नी रेखा आर्या पर 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इसकी जांच कराने की मांग भी की है। वहीं, रेखा आर्या ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। इस बीच बरेली में दोनों से जुड़े बताए जा रहे दर्जनों बीघा क्षेत्र में बने आलीशान आवास को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक होटल, रिसॉर्ट और जमीनों में गिरधारी के कथित निवेश तथा संपत्तियों के स्रोत को लेकर चर्चा तेज है। लेकिन इन संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व, मूल्य, आय के स्रोत और किसी कथित अनियमितता का पता राजस्व अभिलेखों तथा वित्तीय दस्तावेजों की जांच से ही चल सकेगा। अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि एसआईटी ने इन सभी संपत्तियों की औपचारिक जांच शुरू की है।
कंपनियों से बाहर करने का आरोप, फर्जी हस्ताक्षरों की भी जांच
रेखा आर्या ने पति पर आरोप लगाया है कि उनके कथित फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों के माध्यम से उन्हें कुछ कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया गया। यह आरोप एसआईटी की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जांच टीम कंपनियों से संबंधित दस्तावेजों, इस्तीफे की प्रक्रिया और हस्ताक्षरों की प्रमाणिकता की पड़ताल कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक जांच की मदद भी ली जा सकती है।
अस्पताल से रेखा आर्या का पलटवार, गोल्ज्यू देवता की कसम खाकर दी चुनौती
पति की ओर से भ्रष्टाचार और कथित ऑडियो को फर्जी बताने के आरोपों के बीच कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने भी पलटवार किया है। उन्होंने गोल्ज्यू देवता की कसम खाकर ऑडियो के सही होने का दावा किया। रेखा आर्या का कहना है कि विवाह के समय उन्हें पति की पहली शादी की जानकारी नहीं थी। उन्होंने पति पर उत्पीड़न, मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी, फर्जीवाड़े और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। गिरधारी ने इन आरोपों से इनकार किया है।
सत्ता के गलियारों में बढ़ती सक्रियता के बीच कानूनी विवाद ने बढ़ाईं चुनौतियां
पप्पू गिरधारी की पहचान बरेली की राजनीति और उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या के पति के रूप में रही है। राजनीतिक गतिविधियों में उनकी मौजूदगी के बावजूद वह स्वयं किसी बड़े निर्वाचित पद तक नहीं पहुंच पाए। अब पत्नी के साथ सार्वजनिक विवाद और आपराधिक आरोपों की जांच ने उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में इस प्रकरण की जांच और उसके निष्कर्षों पर राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है। हालांकि, दोनों राज्यों में सरकारें एक ही दल की होने से किसी मुकदमे में कार्रवाई या उसके परिणाम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
अब एसआईटी की जांच से खुलेगी आरोपों की परतें
फिलहाल इस विवाद में कई सवाल अनुत्तरित हैं। कथित ऑडियो कितना वास्तविक है, कंपनियों के दस्तावेजों में कोई फर्जीवाड़ा हुआ या नहीं, महिला से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है और करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर किए गए दावों का आधार क्या है—इन सबका जवाब जांच से ही मिल सकेगा। जैन दंपती हत्याकांड की अदालती सुनवाई और उत्तराखंड में दर्ज नए मुकदमे की जांच अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। आने वाले दिनों में एसआईटी के निष्कर्ष और अदालत की कार्यवाही गिरधारी लाल साहू से जुड़े मामलों की आगे की दिशा तय करेंगे।