बरेली। बरेली में फर्जी फर्म बनाकर करीब 3.06 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में एसआईटी-जीएसटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को जागेश्वर ट्रेडर्स के मालिक अमन कश्यप को जेल भेजने के बाद अब पुलिस ने उसके साथी सचिन कुमार को भी दबोच लिया है। पूछताछ में सचिन ने फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाने के खेल से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि नुमाइश में झूले के टिकट काटने के दौरान उसकी मुलाकात प्रशांत गुप्ता से हुई थी। इसके बाद अच्छी कमाई के लालच में वह इस काम से जुड़ गया और अपने दो साथियों को भी शामिल करा दिया।
इस मामले में एसआईटी ने गुरुवार रात बिहारीपुर सिविल लाइंस निवासी अमन कश्यप को उसके घर से गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया था। अमन के नाम पर जागेश्वर ट्रेडर्स नाम की फर्म पंजीकृत थी, जिसके जरिए करोड़ों रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पास ऑन करने का आरोप है। राज्य कर विभाग की जांच में फर्म का घोषित कारोबारी पता मौल्या मार्केट, छोटी बिहार, पीलीभीत बाईपास पर अस्तित्व में नहीं मिला था। विभाग ने करीब 3.06 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आने पर इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अमन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस सचिन कुमार और अन्य आरोपियों की तलाश कर रही थी।
नुमाइश में हुई मुलाकात से शुरू हुआ फर्जी फर्म बनाने का खेल
पुलिस पूछताछ में सचिन कुमार ने बताया कि कई साल पहले वह अपने मोहल्ले के अमन कश्यप और अरुण कुमार के साथ बिशप मंडप में लगने वाली नुमाइश में झूले पर टिकट काटने का काम करता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात मठ लक्ष्मीपुर निवासी प्रशांत गुप्ता से हुई। प्रशांत ने उसे अपने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया। सचिन के मुताबिक प्रशांत ने बताया कि कुछ लोगों की आईडी लगाकर उनके नाम पर फर्म खोली जाएगी। इन फर्मों के जरिए कारोबार दिखाया जाएगा और बदले में अच्छी कमाई होगी। अधिक रुपये मिलने की बात सुनकर सचिन तैयार हो गया। इसके बाद उसने अमन कश्यप और अरुण कुमार को भी इस काम के लिए राजी कर लिया।
55-55 हजार रुपये का लालच देकर लिए आधार और पैन कार्ड
सचिन ने पुलिस को बताया कि वह अमन और अरुण को लेकर मिनी बाईपास स्थित पारस ट्रेडर्स पहुंचा था। वहां प्रशांत गुप्ता का भाई पारस और पिता सुभाष गुप्ता भी मौजूद थे। प्रशांत ने तीनों को भरोसा दिलाया कि उनके नाम से कारोबार शुरू कराया जाएगा और शुरुआत से ही रुपये मिलने लगेंगे। कारोबार बढ़ने पर हिस्सेदारी भी बढ़ाई जाएगी। पूछताछ के अनुसार अमन कश्यप और अरुण कुमार को 55-55 हजार रुपये देने की बात तय हुई थी। इसके बाद उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो लिए गए। सचिन ने बताया कि उसे करीब छह महीने तक नकद रुपये मिलते रहे। पुलिस अब इन दस्तावेजों के जरिए बनाई गई फर्मों और उनके माध्यम से किए गए लेनदेन की जांच कर रही है।
अमन की गिरफ्तारी के अगले ही दिन सचिन भी गिरफ्तार
अमन कश्यप को जेल भेजने के बाद एसआईटी ने अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी थी। एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर एसआईटी-जीएसटी के मुख्य विवेचक एवं कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की। शनिवार तड़के मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस ने नैनीताल रोड स्थित कुदेशिया पेट्रोल पंप के पास घेराबंदी कर 25 वर्षीय सचिन कुमार पुत्र गिरीश कुमार निवासी किशोर बाजार, बिहारीपुर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
फर्जी फर्मों के नेटवर्क की जांच में जुटी एसआईटी
राज्य कर विभाग की शिकायत पर इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज है। पुलिस अब तक इस मामले में अमन कश्यप और सचिन कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों आरोपियों की पूछताछ में फर्जी फर्म बनाने के लिए दस्तावेज जुटाने, कारोबार दिखाने और बदले में नकद रुपये देने की बात सामने आई है। हालांकि, फर्जी आईटीसी का लाभ किन-किन व्यापारियों तक पहुंचा और इस नेटवर्क में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही, इसकी जांच अभी जारी है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर, उपनिरीक्षक राजा भारद्वाज, कांस्टेबल प्रिंस कुमार, अभिषेक कुमार, कपिल कुमार, राहुल कुमार और महिला कांस्टेबल शीबा शामिल रहीं।