बरेली। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी संगठन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाकर सियासी हलचल तेज कर दी है। अपने इस्तीफे में उन्होंने भाजपा के भीतर तानाशाही, गुटबाजी, परिवारवाद, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी समेत कई मुद्दों को उठाया है। इतना ही नहीं, उन्होंने बरेली मंडल में आगामी चुनाव के दौरान भाजपा की 80 प्रतिशत सीटों पर हार की आशंका भी जताई है। पूर्व सांसद के इन आरोपों से जिले की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
दूसरी तरफ पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने कहा यह पत्र हमारा नहीं है। किसी घटिया मानसिकता वश इसको बनाया गया है। इससे यह प्रतीत होता है कि मेरे विरोधी किस घटिया स्तर तक गिर सकते हैं।
भाजपा को बताया प्राइवेट कंपनी, कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने इस्तीफे में भाजपा की तुलना एक प्राइवेट कंपनी से करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र समाप्त होता जा रहा है। संगठन में समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जबकि पदाधिकारियों का चयन कार्यकर्ताओं की राय के बजाय ऊपर से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कुछ चुनिंदा नेताओं का दबदबा बढ़ गया है और जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज को महत्व नहीं दिया जा रहा है।
परिवारवाद और गुटबाजी से संगठन को नुकसान पहुंचने का दावा
पूर्व सांसद ने भाजपा में बढ़ते परिवारवाद और आपसी गुटबाजी पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि संगठन में योग्यता और वर्षों की मेहनत के बजाय नेताओं की नजदीकी को तरजीह दी जा रही है। इससे पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने पिछड़े और दलित वर्ग के कार्यकर्ताओं को संगठन में उचित सम्मान और भागीदारी नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है।
जिलाध्यक्षों को हर महीने एक से दो लाख रुपये देने का आरोप
धर्मेंद्र कश्यप ने संगठन में पैसों के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के अध्यक्षों को हर महीने एक से दो लाख रुपये तक दिए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि संगठन में धनबल का प्रभाव बढ़ने से कार्यकर्ताओं की मेहनत और निष्ठा का महत्व कम होता जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में किसी जांच या आधिकारिक पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
थाने से तहसील तक भ्रष्टाचार, 20 प्रतिशत कमीशनखोरी का आरोप
पूर्व सांसद ने सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने से लेकर तहसील तक भ्रष्टाचार का बोलबाला है और विभिन्न कार्यों में 20 प्रतिशत तक कमीशनखोरी की जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से आम जनता परेशान है और सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नगर निगम के एक हजार करोड़ से अधिक के बजट की जांच की मांग
धर्मेंद्र कश्यप ने बरेली नगर निगम के एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बजट और उससे संबंधित कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता के पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होना चाहिए और विकास कार्यों में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।
बरेली मंडल की 80 प्रतिशत सीटों पर हार की जताई आशंका
पूर्व सांसद ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो आगामी चुनाव में पार्टी को बरेली मंडल की करीब 80 प्रतिशत सीटों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि केवल हिंदू-मुस्लिम मुद्दों के सहारे हर चुनाव नहीं जीता जा सकता। चुनाव जीतने के लिए जनता की समस्याओं का समाधान और कार्यकर्ताओं का सम्मान जरूरी है।
इस्तीफे के बाद गरमाई सियासत, भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार
धर्मेंद्र कश्यप के इस्तीफे और उसमें लगाए गए आरोपों ने बरेली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। संगठन की कार्यप्रणाली से लेकर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार तक के सवाल उठने से राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, पूर्व सांसद की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इन आरोपों पर भाजपा का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।