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UP NEWSडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपते व्यापार मंडल के पदाधिकारी।

बरेली। खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग प्रक्रिया को लेकर छोटे दुकानदारों में नाराजगी बढ़ रही है। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि खाद्य पदार्थों के नमूने लेने और जांच की प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण खुदरा व थोक कारोबारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसको लेकर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश ने सैंपलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और व्यापारियों का अनावश्यक उत्पीड़न रोकने की मांग उठाई है। संगठन ने इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय में एसडीएम कुमारी पूनम भास्कर को ज्ञापन सौंपा।

निर्माता की जिम्मेदारी तय करने की मांग

जिला अध्यक्ष अकरम खान और जिला महामंत्री कमल गुप्ता के नेतृत्व में पहुंचे व्यापारियों ने कहा कि खुदरा और थोक दुकानदार बिल के आधार पर निर्माताओं से सामान खरीदते हैं। ऐसे में यदि किसी सीलबंद पैकेट में नकली, डुप्लीकेट या मानकों के विपरीत खाद्य पदार्थ मिलता है तो इसकी जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की तय होनी चाहिए। व्यापारियों ने मांग की कि खरीद का बिल प्रस्तुत करने पर निर्माता को भी सैंपलिंग प्रक्रिया में पक्षकार बनाया जाए। साथ ही नियमानुसार फॉर्म-5क की सूचना पंजीकृत डाक से तत्काल भेजी जाए।

महीनों बाद मिलती है जांच रिपोर्ट

व्यापार मंडल ने खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट मिलने में देरी का मुद्दा भी उठाया। संगठन का कहना है कि रिपोर्ट आने में कई महीने लग जाते हैं, जबकि अधिनियम के तहत 14 दिन में रिपोर्ट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। व्यापारियों ने राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशालाओं को निर्धारित समय में रिपोर्ट जारी करने के निर्देश देने की मांग की। नमूना फेल होने की स्थिति में केंद्रीय प्रयोगशाला से दोबारा जांच कराने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने की बात कही।

अंतिम रिपोर्ट से पहले कार्रवाई पर जताई आपत्ति

ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि केंद्रीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने से पहले खाद्य पदार्थों को नष्ट करने या जब्त करने की कार्रवाई से कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए। संगठन ने अधोमानक और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के बीच स्पष्ट अंतर रखने की मांग करते हुए कहा कि खाद्य पदार्थ को असुरक्षित घोषित करने में स्वास्थ्य पर पड़ने वाले वास्तविक नुकसान को भी ध्यान में रखा जाए।

मामूली मामलों में समझौते की व्यवस्था लागू करने की मांग

व्यापारियों ने मामूली मामलों में समझौते की व्यवस्था लागू करने, पूर्णकालिक न्याय निर्धारण अधिकारी नियुक्त करने और फर्जी शिकायतों के आधार पर सैंपलिंग की कार्रवाई रोकने की मांग की। इसके अलावा निजी प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के आधार पर निर्माताओं के खिलाफ होने वाली कार्रवाई की समीक्षा करने, सर्वे सैंपलों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और खाद्य पदार्थों के मानकों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने की मांग भी उठाई।

जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया हो पारदर्शी

व्यापार मंडल का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकना जरूरी है, लेकिन जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि मिलावट करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो और नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों को बेवजह परेशानी न उठानी पड़े। ज्ञापन देने वालों में अकरम खान, कमल गुप्ता, परवेज आलम, जाकिर हुसैन और मुदित प्रताप सिंह सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।

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