बरेली। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भुगतान और न्यायालय से जुड़े मामलों में कार्रवाई नहीं करने के आरोप में नगर निगम के एक कर्मचारी पर गाज गिरी है। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। संपत्ति कर विभाग से जुड़े इस प्रकरण की जांच नगर निगम के लेखाधिकारी करेंगे।
कार्रवाई के केंद्र में सेवानिवृत्त कर समाहर्ता ब्रह्म शंकर त्रिपाठी के वेतन और अन्य बकाया भुगतान का मामला है। त्रिपाठी ने 14 मई और तीन जून 2026 को आवेदन देकर पुनरीक्षित वेतनमान के आधार पर वेतन, एसीपी, ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश और बीमा राशि समेत अन्य देयकों के भुगतान की मांग की थी। आरोप है कि इस मामले में समय से जरूरी कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट के आदेश और नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के पूर्व निर्देश के आधार पर मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने त्रिपाठी का वेतन एक जनवरी 2006 से एक जुलाई 2022 तक नियमानुसार दोबारा निर्धारित करने को कहा था। इसके बाद 21 अगस्त 2026 को वेतन निर्धारण कर फाइल संबंधित विभाग को लौटा दी गई। लेकिन निलंबन आदेश के मुताबिक, इसके बाद भी देयकों के भुगतान की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
15 सितंबर का निर्देश भी बेअसर, आर्थिक तंगी में परिवार
नगर आयुक्त ने 15 सितंबर को मुख्य नगर लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई का निर्देश दिया था। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी ने इसके बावजूद भुगतान के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। निलंबन आदेश में कहा गया है कि भुगतान नहीं होने से सेवानिवृत्त कर्मचारी का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। समय पर कार्रवाई नहीं होने की जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की बताई गई है। मामले में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने पांच अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर नगर आयुक्त ने कड़ा कदम उठाया। अधिकारियों के आदेशों का पालन नहीं करने और कर्मचारी सेवा नियमावली की अनदेखी को निलंबन का आधार बनाया गया है।
एक मामला नहीं, दूसरे प्रकरणों में भी देरी का आरोप
निलंबन आदेश में कई अन्य मामलों का भी जिक्र है। संपत्ति कर विभाग के लिपिक राघिव हुसैन की लगातार अनुपस्थिति और न्यायालय व उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना से जुड़े मामले में समय पर विभागीय कार्रवाई नहीं कराने का आरोप भी संबंधित कर्मचारी पर है। इसके अलावा सेवानिवृत्त लिपिक शफकतयार खां, बनवारी लाल और शमीम बेग से जुड़े न्यायालयी मामलों में भी समय से कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है। निलंबित कर्मचारी को निलंबन अवधि के दौरान कार्यालय अधीक्षक के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। नगर आयुक्त ने पूरे प्रकरण की जांच लेखाधिकारी को सौंपी है। जांच में संबंधित कर्मचारी पर लगे आरोपों की पड़ताल की जाएगी।