2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण तय करने की कवायद, 50 फीसदी अनारक्षित वर्ग के लिए रखने की बात
बरेली। आगामी ग्रामीण निकाय चुनावों में आरक्षण की तस्वीर साफ करने की कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को विकास भवन सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की समिति की बैठक हुई। अध्यक्षता न्यायमूर्ति रामऔतार ने की। बैठक में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर आरक्षण निर्धारण के लिए चल रहे सर्वे और जनप्रतिनिधियों से जुटाई जा रही जानकारी पर चर्चा हुई।
50 फीसदी अनारक्षित, बाकी में आरक्षित वर्गों का निर्धारण
न्यायमूर्ति रामऔतार ने बताया कि आरक्षण व्यवस्था में 50 फीसदी हिस्सेदारी अनारक्षित वर्ग के लिए रखने की बात है। शेष 50 फीसदी में ओबीसी, एससी, एसटी समेत अन्य आरक्षित वर्गों के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है और सरकार की मंशा 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण सुनिश्चित करने की है।
आरक्षण प्रक्रिया पर सवाल, सीधे जवाब से बचते नजर आए अध्यक्ष
बैठक के बाद पत्रकारों ने आयोग अध्यक्ष से आरक्षण की प्रक्रिया, सर्वे के आधार और आगामी चुनावों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल किए। इस दौरान न्यायमूर्ति रामऔतार कई सवालों पर सीधे जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने अपने साथ मौजूद अधिकारियों को पत्रकारों से बातचीत करने के लिए कह दिया। अध्यक्ष के इस रुख के बाद सर्वे और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे।
जनप्रतिनिधियों से जुटाई गई पिछड़े वर्ग की जानकारी
बैठक में आयोग की टीम ने ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्ग की स्थिति से संबंधित जानकारी जनप्रतिनिधियों से जुटाई। आरक्षण निर्धारण के लिए स्थानीय स्तर के आंकड़ों और सर्वे की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्रों में पिछड़े वर्ग की आबादी और आरक्षण से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों की जानकारी ली गई।
बैठक में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल, भोजीपुरा ब्लॉक प्रमुख योगेश पटेल, शेरगढ़ ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि भूपेंद्र कुर्मी समेत विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि और ग्राम प्रधान मौजूद रहे। आयोग की टीम ने आरक्षण प्रक्रिया के लिए आवश्यक स्थानीय सूचनाएं और आंकड़े संकलित किए।
सर्वे के आंकड़ों पर टिकी आरक्षण की तस्वीर
आयोग की कवायद के बीच अब निगाहें सर्वे से जुटाए जाने वाले आंकड़ों पर हैं। 2011 की जनगणना के आंकड़ों और स्थानीय स्तर पर जुटाई जा रही जानकारी के आधार पर आरक्षण का अंतिम निर्धारण किस तरह होगा, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल आयोग की बैठक के बाद आरक्षण को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।