बरेली। बरेली में सरकारी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनके सहारे लोगों से मोटी रकम वसूलने वाले गिरोह का भमोरा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फरार हैं।
मामले का खुलासा मंगलवार को हुआ, जब भमोरा पुलिस संदिग्ध लोगों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि सरकारी विभागों के अधिकारियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के दो सदस्य इलाके में घूम रहे हैं और उनके पास हथियार भी हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने ग्राम ब्राह्मपुर से पहले बंद पड़े ईंट भट्ठे के आसपास घेराबंदी कर दी। यहां से राजवीर राठौर निवासी चकमहमूद, थाना बारादरी और निकेत भारद्वाज निवासी खन्नू मोहल्ला, थाना किला को पकड़ लिया गया। पकड़े गए आरोपियों के पास से दो कथित फर्जी आधार कार्ड और अधिकारियों के नाम से तैयार दो फर्जी आदेशों की छायाप्रति मिली हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों के पास से 315 बोर के दो तमंचे और दो जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं।
कचहरी से तैयार होते थे कागज, पूछताछ में खुली गिरोह की परतें
पुलिस ने दोनों की तलाशी ली तो मामला संदिग्ध से कहीं ज्यादा गंभीर निकला। उनके पास से दो फर्जी आधार कार्ड और दो कथित फर्जी सरकारी आदेशों की छायाप्रति बरामद हुईं। इसके साथ ही दोनों के पास एक-एक 315 बोर का तमंचा और एक-एक जिंदा कारतूस मिलने का दावा किया गया है। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। भमोरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।पुलिस के मुताबिक पूछताछ में राजवीर राठौर ने गिरोह के काम करने का तरीका बताया। आरोप है कि राजवीर अपने साथी पप्पू मौर्य, शिवलाल मौर्य और शशांक वर्मा के साथ मिलकर अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों के नाम से फर्जी कागजात तैयार कराता था। इन कागजात को तैयार करने में निकेत भारद्वाज की भूमिका सामने आने का पुलिस ने दावा किया है। निकेत कचहरी में बैठकर कंप्यूटर संबंधी काम करता है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में बताया गया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के बाद इनका इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने और उनसे रुपये वसूलने में किया जाता था।
कितने अफसरों के नाम से बने फर्जी आदेश? पुलिस खंगाल रही पूरा नेटवर्क
गिरोह काफी समय से फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम कर रहा था। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपियों ने अब तक किन-किन सरकारी विभागों और अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किया और कितने लोगों को इन दस्तावेजों के जरिये निशाना बनाया। पुलिस बरामद दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस मामले में पुलिस ने पप्पू मौर्य निवासी चकमहमूद, शिवलाल मौर्य निवासी मेहतरपुर करोड़ और लखनऊ के राजेंद्र नगर निवासी शशांक वर्मा को भी आरोपी बताया है। तीनों फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। गिरफ्तार राजवीर और निकेत को न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की गई है।
हत्या से गैंगस्टर तक, राजवीर पर पहले से कई मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राजवीर राठौर का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ बरेली और संभल के विभिन्न थानों में हत्या, धोखाधड़ी, रंगदारी, एनडीपीएस एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। इनमें बारादरी थाने में हत्या का मुकदमा और चंदौसी में गैंगस्टर एक्ट समेत अन्य मामले शामिल हैं। वहीं निकेत भारद्वाज के खिलाफ पुलिस ने मौजूदा मामले के अलावा किसी अन्य मुकदमे का विवरण प्रेस नोट में नहीं दिया है। कार्रवाई थाना प्रभारी कुशलपाल सिंह के नेतृत्व में की गई। टीम में उपनिरीक्षक नरेंद्र शर्मा, उपनिरीक्षक आजाद कुमार और प्रशिक्षु आरक्षी अमित, अक्षय व विपिन शामिल रहे। पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही फर्जी दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।