बरेली। शहर में कॉलोनी, मकान और बहुमंजिला इमारतें बनाने वाले बिल्डरों को बीडीए ने साफ चेतावनी दे दी है। जिस नक्शे को मंजूरी मिली है, निर्माण भी उसी के मुताबिक करना होगा। मनमाने तरीके से निर्माण किया तो आगे पूरी परियोजना फंस सकती है। इतना ही नहीं, निर्माण पूरा होने के बाद जरूरी विभागों की मंजूरी और पूर्णता प्रमाणपत्र लिए बिना खरीदारों को मकान या फ्लैट का कब्जा भी नहीं दिया जाए। गुरुवार को आयोजित विकास संवाद में 30 से अधिक बिल्डर, डेवलपर और तकनीकी विशेषज्ञों के सामने प्राधिकरण ने नियमों की पूरी तस्वीर साफ कर दी।
बैठक में सबसे ज्यादा जोर स्वीकृत नक्शे के मुताबिक निर्माण पर रहा। बिल्डरों से साफ कहा गया कि जिस नक्शे को प्राधिकरण ने मंजूर किया है, निर्माण उसी के अनुसार होना चाहिए। निर्माण के दौरान मनमाने बदलाव बाद में बिल्डर के साथ खरीदार के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। परियोजना से जुड़े सभी जरूरी कागजात भी पूरे और अद्यतन रखने होंगे। निर्माण पूरा होने के बाद पूर्णता प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी होगी।
मकान तैयार होते ही चाबी नहीं
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे ने कहा इमारत खड़ी कर देना ही परियोजना पूरी होना नहीं है। अग्निशमन विभाग, वायुसेना समेत जहां-जहां से अनापत्ति प्रमाणपत्र जरूरी है, वहां से मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ भू-संपदा विनियामक बीडीए में पंजीकरण और दूसरी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी करनी होंगी। सभी जरूरी स्वीकृतियां और प्रमाणपत्र पूरे किए बिना खरीदार को कब्जा नहीं देने पर जोर दिया गया। यानी निर्माण पूरा होने के बाद भी कागजात अधूरे हैं तो मामला अटक सकता है।
बिल्डरों ने खोला परेशानियों का पिटारा
विकास संवाद में 30 से अधिक बिल्डर, डेवलपर और लाइसेंस प्राप्त तकनीकी विशेषज्ञ पहुंचे। उन्होंने नक्शा पास कराने से लेकर अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने तक आ रही परेशानियां अधिकारियों के सामने रखीं। कई मामलों में अधिकारियों ने मौके पर ही समाधान और आगे की प्रक्रिया बताई। जिन मामलों का तत्काल हल नहीं निकल सका, उनमें संबंधित अधिकारियों को नियम के अनुसार तय समय में कार्रवाई करने को कहा गया।
ऑनलाइन नक्शे की आपत्तियों में फंसे तो ऐसे निकलेगा रास्ता
बैठक में ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति प्रणाली को लेकर भी सवाल उठे। तकनीकी विशेषज्ञों ने नक्शा जमा करने, दस्तावेज लगाने और बार-बार आने वाली आपत्तियों से जुड़ी परेशानियां बताईं। बीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि प्रक्रिया को आसान और तेज करने का प्रयास किया जाएगा। सही कागजात और नियम पूरे होने के बाद फाइल बेवजह नहीं अटकनी चाहिए। आपत्ति आने पर उसका समय से निस्तारण कराया जाएगा।
अग्निशमन से वायुसेना तक की मंजूरी पर खास नजर
बैठक में पूर्णता और अधिभोग प्रमाणपत्र, आंतरिक विकास कार्य, शमन, अग्निशमन विभाग और वायुसेना से अनापत्ति प्रमाणपत्र जैसे मामलों पर विस्तार से बात हुई। खासतौर पर वायुसेना से जुड़ी मंजूरी और विमानन सुरक्षा नियमों को लेकर बिल्डरों को सावधानी बरतने को कहा गया। निर्माण शुरू करने और उसे पूरा करने के दौरान जरूरी नियम समय पर पूरे करने पर जोर दिया गया, ताकि बाद में परियोजना किसी कानूनी या तकनीकी अड़चन में न फंसे।
अब फाइल लेकर चक्कर नहीं, सामने बैठकर बताओ कहां अटका प्रोजेक्ट
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे ने बिल्डरों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का रास्ता खोलने पर जोर दिया है। इसके पीछे कोशिश है कि छोटी प्रक्रिया या कागज की कमी के कारण बड़ी परियोजनाएं महीनों तक न अटकी रहें। बीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि बिल्डर अपनी परेशानी सीधे प्राधिकरण के सामने रखें। जो समस्या नियमों के दायरे में दूर हो सकती है, उसका जल्द समाधान निकाला जाएगा।
बिल्डरों को राहत भी, लेकिन नियम तोड़े तो मुश्किल भी
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे ने एक तरफ बिल्डरों की अटकी समस्याओं को तेजी से दूर करने का भरोसा दिया तो दूसरी तरफ नियमों के पालन को लेकर भी तस्वीर साफ कर दी। बिल्डरों को निर्धारित मानकों के मुताबिक ही परियोजनाएं पूरी करनी होंगी और प्राधिकरण के साथ लगातार तालमेल रखना होगा। नक्शा मंजूर कराने के बाद मनमाना निर्माण नहीं चलेगा। परियोजना पूरी होने पर जरूरी प्रमाणपत्र और मंजूरियां लेनी होंगी और उसके बाद ही खरीदार को कब्जा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।