बरेली। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार संविदा कर्मचारी कुलदीप की सेवा समाप्त कर दी गई है, जबकि सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने डॉ. एलके सक्सेना को दिव्यांग मेडिकल बोर्ड से हटा दिया है। अब छह वर्षों में जारी प्रमाणपत्रों की पूरी कुंडली खंगाली जा रही है।
बरेली में बने आठ जाली प्रमाणपत्र
जांच में बरेली से कान संबंधी आठ जाली दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए जाने की बात सामने आई है। वहीं, बदायूं में आंखों से संबंधित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किए जाने की आशंका भी जांच के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग ने तीन संदिग्ध प्रमाणपत्रों से जुड़ी रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंप दी है।
कुलदीप को लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंची पुलिस
संविदा कर्मचारी कुलदीप की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस उसे लेकर दोबारा बरेली के सीएमओ कार्यालय पहुंची थी। पुलिस ने करीब दो घंटे तक दिव्यांग प्रमाणपत्र पटल पर रिकॉर्ड खंगाले और कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच के लिए कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और प्रिंटर भी कब्जे में लिए गए हैं।
छह वर्षों के प्रमाणपत्रों की खुलेगी फाइल
दिल्ली पुलिस अब पिछले छह वर्षों के दौरान जारी किए गए दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच कर रही है। रिकॉर्ड से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी प्रमाणपत्र किस स्तर से और किन लोगों की मिलीभगत से बनाए गए। प्रमाणपत्रों के आवेदन, मेडिकल परीक्षण, स्वीकृति और ऑनलाइन एंट्री से जुड़े प्रत्येक चरण की पड़ताल की जा रही है।
दो बाबुओं की भूमिका भी जांच के घेरे में
कुलदीप से हुई पूछताछ के आधार पर सीएमओ कार्यालय के दो बाबुओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। दिल्ली पुलिस उनसे जुड़े रिकॉर्ड और गतिविधियों की पड़ताल कर रही है। जांच आगे बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ हो सकती है।
सीएमओ ने बनाई विभागीय जांच समिति सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने मामले की विभागीय जांच के लिए समिति गठित कर दी है। समिति प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया के साथ मेडिकल बोर्ड, संबंधित पटल और कर्मचारियों की भूमिका की जांच करेगी। फिलहाल कुलदीप की सेवा समाप्त कर दी गई है और डॉ. एलके सक्सेना को मेडिकल बोर्ड से बाहर कर दिया गया है।