बरेली। रोजगार, आरक्षण और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सामान्य समाज के लोगों और युवाओं ने सोमवार को कचहरी स्थित सेठ दामोदर पार्क में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को इसका आधार बनाने की मांग उठाई। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ाने, SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने और UGC के नए नियमों पर पुनर्विचार की मांग भी की गई।
हर वर्ग में गरीब, आर्थिक स्थिति बने आरक्षण का आधार
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं हैं। गरीबी हर समाज में है, इसलिए शिक्षा और रोजगार में अवसर देते समय आर्थिक स्थिति को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के युवाओं को भी आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी समाज या वर्ग को मिल रहे अधिकारों के विरोध में नहीं है। उनकी मांग है कि व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर प्रत्येक जरूरतमंद को समान अवसर मिल सके।
SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग पर उठाए सवाल
धरने में SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में कानून का गलत इस्तेमाल कर लोगों को मुकदमों में फंसाया जाता है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि कानून का वास्तविक उद्देश्य भी बना रहे और किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।
UGC के नए नियमों पर भी जताई चिंता
प्रदर्शनकारियों ने UGC के नए नियमों को लेकर भी अपनी आपत्तियां रखीं। वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े किसी भी नियम का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों पर पड़ता है। ऐसे में नियम बनाते और लागू करते समय सभी वर्गों के विद्यार्थियों के हितों और उनकी चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
रोजगार बढ़ाने की मांग, सरकार को दिया राजनीतिक संदेश
धरने में बेरोजगारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा युवाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की। वक्ताओं ने राजनीतिक दलों को भी संदेश देते हुए कहा कि सामान्य समाज की समस्याओं और युवाओं के रोजगार के सवालों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने और उनकी अन्य मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।